प्रफुल्ला कुमार मिश्रा : ଶିଖ ସନାତନ ଜୈନ ମୁସଲମାନଇସାଇ ହୁଅ କି ବୌଦ୍ଧମାଆ ତ ଗୋଟିଏ କୋଳେ ତା କୋଟିଏଅଭିନ୍ନ ବାସନା ସୌଧ।। ଦୁଃଖ କଷ୍ଟ… READ MORE
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नमिता पूनम: पइढ़-लिख के भी जिनगी,ढ़पियाते दिन जाथे!आइज हिञा तो काइल हुवां कर,चक्कर काटते दिन सिराथे।१। गांव- समाज में तो… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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