एक पेड़ ज़िंदगी के नाम

जतिलाल सोलंकी: बहुत पुराना है यह वट वृक्ष,घना जंगल था इसके आसपास। प्रातः काल सूर्य उदय के समय,गूंजती थी पक्षियों की आवाज।  कुछ साल पहले, बसते

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जंगल बचाओ, जीवन बचाओ

गोपाल पटेल; कृष्णा सोलंकी: मैं बक्सवाहा का जंगल हूँ,जो भी कोई जीव मेरी गोद में समाए हुए हैं,मैं उनका लालन-पालन करती हूँ। आज मुझे बचा

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