कोर्दुला कुजूर: झारखंड के सभी आदिवासी समाजों में बीज बोने की रीतियाँ और परंपराएँ लगभग एक जैसी हैं। साथ ही… READ MORE
दीपक कांबले: बदलत्या वातावरणामुळे शेतकऱ्यांपुढे आज खूप मोठे आव्हान निर्माण झाले आहे. बदलत्या वातावरणाचा परिणाम महाराष्ट्रातील शेतीवर, पर्यायाने शेतकऱ्यांवर होताना… READ MORE
मान्या: अपने जानने, समझने और सीखने की प्रक्रिया के दौरान मुझे गाँव के लोगों के जीवन और उनकी खेती-किसानी की… READ MORE
Maani: My first love bloomed in a sugarcane field. It happened during an NSS camp in Marayoor, a small town… READ MORE
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पंकज: बीज अधिनियम, 1966 पर लेख की श्रृंखला के भाग–1 में हम इस अधिनियम के उद्देश्य तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण… READ MORE
दिपक कांबळे आधुनिक पद्धतीला छेद देत युवा शेतकरी पारंपरिक पद्धतीने शेतीकडे वळताना दिसत आहे. ‘जुनं ते सोनं’ या म्हणीप्रमाणे आज… READ MORE
Maani / मानी: From early mornings to long, unending days, these photographs trace lives shaped by work, movement, and quiet… READ MORE
जलेश्वर महतो: आसार सावन भादों, होवत नखे खेत कादो,खेत में बीड़ा सुखथे,आरी बैठी किसान रोजे कांदथे,कहत में बीड़ा सुखथे…… ।।1।।… READ MORE
शैलेश सिंह: संगीत दिवस के दौरान मेरा मिलना तीन नए साथियों से हुआ, यह तीन साथी महिमा, मैरी और खुशबू… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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