नारायण कांडेयांग:

31 जुलाई से 2 अगस्त तक हरियाणा विज्ञान मंच की ओर से रोहतक, हरियाणा में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “Scientific Explanation of Miracles” में  भागीदारी निभाने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम का उद्देश्य तथाकथित चमत्कारों के पीछे छिपे वैज्ञानिक तथ्यों को समझना, उनका तार्किक विश्लेषण करना तथा समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता को बढ़ावा देना था। 

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेष सम्मानित अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित तर्कवादी डॉ. नरेंद्र नायक जी उपस्थित रहे। उन्होंने विभिन्न प्रकार के तथाकथित चमत्कारों को उपस्थित प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत किया और फिर उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों तथा तकनीकों का विस्तार से पर्दाफाश किया। इन प्रस्तुतियों को देखकर हम सभी प्रतिभागी आश्चर्यचकित रह गए। इसके साथ ही उन्होंने इन तथाकथित चमत्कारों को स्वयं करके दिखाया और प्रतिभागियों को भी उनके पीछे की कला एवं तकनीक का अभ्यास कराने का प्रयास किया।

डॉ. नरेंद्र नायक जी देश के चर्चित पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और तर्कवादी साथी गौरी लंकेश के करीबी मित्रों में से एक रहे हैं। गौरी लंकेश की वर्ष 2017 में बेंगलुरु स्थित उनके आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। डॉ. नरेंद्र नायक जी ने बताया कि उन्हें और उनके साथियों को भी लगातार हत्या की धमकियाँ मिलती रही हैं। उनका कहना है कि वर्तमान समय में देश में तार्किक और वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोगों को कम स्वीकार किया जाता है। इसके बावजूद मानवता, समानता, न्याय और बंधुत्व की स्थापना के लिए तथाकथित चमत्कारों और अंधविश्वासों का वैज्ञानिक तरीके से पर्दाफाश करना बेहद आवश्यक है।

इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान हमने यह भी सीखा कि किसी तथाकथित चमत्कार या जादुई प्रदर्शन के दौरान दर्शकों का ध्यान एक निश्चित दिशा में बनाए रखने के लिए एक विशेष स्क्रिप्ट और प्रस्तुति शैली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसी भी कला या तथाकथित चमत्कार को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के पीछे कोई अलौकिक शक्ति नहीं, बल्कि तकनीक, अभ्यास, प्रस्तुति और कई बार हमारी आँखों का भ्रम काम करता है।

इन सभी गतिविधियों में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन हम अक्सर इन्हें ‘जादू’ या ‘चमत्कार’ कहकर अंधविश्वास के नजरिये से देखते हैं और जाने-अनजाने इन्हें बढ़ावा देते रहते हैं। वर्तमान समय में ऐसी प्रवृत्तियों को विभिन्न स्तरों पर बढ़ावा मिलने से समाज में वैज्ञानिक एवं तार्किक सोच के बजाय अंधविश्वास और मानसिक गुलामी को बढ़ावा मिलने का खतरा है। इसलिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और लोगों को तथ्यों के आधार पर सोचने के लिए प्रेरित करना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी है।

डॉ. नरेंद्र नायक जी के अलावा प्रशिक्षण में शामिल अन्य साथियों ने भी अपनी-अपनी कलाओं और तकनीकों का प्रदर्शन किया। साथ ही, तथाकथित चमत्कारों की प्रस्तुति के लिए स्क्रिप्ट तैयार करने और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से समझाने का प्रशिक्षण भी दिया गया। यह प्रशिक्षण हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण और उपयोगी रहा। इससे हमें यह विश्वास मिला कि ऐसे कार्यक्रम देश के हर कोने में आयोजित किए जा सकते हैं और जहाँ भी साथी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करना चाहेंगे, वहाँ हरियाणा विज्ञान मंच प्रशिक्षण एवं सहयोग के लिए उपस्थित रहने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमें इस बात की भी खुशी है कि JSSC (झारखंड सामाजिक परिवर्तन शाला) से जुड़कर हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता और मानवता को स्थापित करने की दिशा में लगातार मार्गदर्शन मिल रहा है। इस प्रशिक्षण से हमें विश्वास हुआ है कि हमारे क्षेत्र की सबसे बड़ी सामाजिक समस्याओं में से एक डायन प्रथा और अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता के माध्यम से मजबूत किया जा सकता है।

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण तक हमें मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करने वाले साथी विकास कुमार जी, हरियाणा विज्ञान मंच के ईश्वर नास्तिक जी, JSSC के सभी साथियों तथा इस कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति विशेष आभार और जोहार।

इस प्रशिक्षण ने हमारे भीतर यह विश्वास और मजबूत किया है कि आने वाले दिनों में हम अपने समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता, मानवता, समानता और न्याय की भावना को सकारात्मक दिशा में स्थापित करने के लिए और अधिक मजबूती से काम करेंगे।

Author

  • नारायण कांडेयांग / Narayan Kandeyang

    नारायण कांडेयांग झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा से हैं और सामाजिक परिवर्तन एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे वैज्ञानिक चेतना, तर्कशीलता, अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता तथा मानवता, समानता और न्याय जैसे विषयों पर लिखते हैं। वे झारखंड में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ वैज्ञानिक एवं तार्किक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

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