मंजुलता मिरी:

मेरी नज़र में एक अच्छा स्कूल केवल वह जगह नहीं है जहाँ बच्चों को किताबों की पढ़ाई कराई जाए। स्कूल वह स्थान होना चाहिए जहाँ बच्चों में ज्ञान, समानता, स्वतंत्र सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संवैधानिक मूल्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी की समझ विकसित हो। स्कूल ऐसा होना चाहिए जहाँ हर बच्चा बिना डर के पढ़ सके, अपनी बात रख सके और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर पा सके।

एक अच्छे स्कूल में सबसे पहले सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण होना चाहिए। स्कूल की इमारत मजबूत और साफ-सुथरी हो। बच्चों के लिए साफ पीने का पानी, लड़के और लड़कियों के लिए अलग एवं साफ शौचालय, बिजली, पंखे और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए। लड़कियों के लिए मासिक धर्म के समय आवश्यक स्वच्छता सुविधाएँ भी उपलब्ध होनी चाहिए।

स्कूल में अच्छे और संवेदनशील शिक्षक होने चाहिए। शिक्षक बच्चों के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार करें। जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति या किसी अन्य आधार पर बच्चों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। कमजोर बच्चों को आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सहयोग मिलना चाहिए।

स्कूल में संविधान की शिक्षा

मेरी नज़र में हर स्कूल में बच्चों को भारत के संविधान के बारे में सरल भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए। बच्चों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय, बंधुत्व और अपने मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के बारे में बताया जाना चाहिए।

बच्चों को यह समझना चाहिए कि संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है और किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, लिंग या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। इससे बच्चों में लोकतांत्रिक और समानता की सोच विकसित होगी।

सावित्रीबाई फुले और बाबा साहब के विचार

स्कूलों में बच्चों को सावित्रीबाई फुले, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और अन्य महान समाज सुधारकों एवं विचारकों के जीवन और संघर्ष के बारे में बताया जाना चाहिए।

सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों की शिक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण काम किया। बच्चों को उनके संघर्ष और शिक्षा के प्रति उनके योगदान से प्रेरणा मिलनी चाहिए।

बच्चों को डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के जीवन, शिक्षा, समानता और संविधान निर्माण में उनके योगदान के बारे में भी पढ़ाया जाना चाहिए। इससे बच्चों में यह समझ विकसित होगी कि शिक्षा, समानता और अधिकार हमारे समाज को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण साधन हैं।

इसके साथ ही बच्चों को अन्य महान वैज्ञानिकों, समाज सुधारकों, स्वतंत्रता सेनानियों और मानवतावादी विचारकों के बारे में भी पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को अलग-अलग विचारों और योगदानों को समझने का अवसर मिले।

पूजा-पाठ के स्थान पर वैज्ञानिक सोच

मेरी नज़र में स्कूल शिक्षा और ज्ञान का स्थान होना चाहिए। बच्चों को किसी विशेष धार्मिक पूजा-पाठ या धार्मिक गतिविधि में शामिल करने के बजाय स्कूल में वैज्ञानिक सोच और तर्क करने की क्षमता विकसित की जानी चाहिए।

बच्चों को हर बात को केवल मान लेने के बजाय “क्यों?”, “कैसे?” और “इसका प्रमाण क्या है?” जैसे सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। प्रयोग, विज्ञान, प्रकृति और अपने आसपास की घटनाओं को समझने के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चों की निजी आस्था या परिवार की मान्यताओं का अपमान किया जाए। बल्कि स्कूल का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहाँ सभी बच्चों की गरिमा का सम्मान हो और शिक्षा तर्क, प्रमाण, संविधान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित हो।

शिक्षा किताबों से आगे हो

मेरे अनुसार शिक्षा केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं होनी चाहिए। बच्चों को स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण, लैंगिक समानता, बाल विवाह, बाल मजदूरी, घरेलू हिंसा, नशे से बचाव और अपने अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए।

स्कूल में पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर, डिजिटल शिक्षा, खेल का मैदान और रचनात्मक गतिविधियों की सुविधा होनी चाहिए। दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप और अन्य आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध होनी चाहिए।

बच्चों की सुरक्षा और सम्मान

स्कूल में बच्चों के साथ मारपीट, डराना-धमकाना, भेदभाव या किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होनी चाहिए। बच्चों को अपनी समस्या और शिकायत खुलकर बताने का अवसर मिलना चाहिए। उनकी बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

अभिभावकों और समुदाय को भी स्कूल से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न हो और हर बच्चा सुरक्षित वातावरण में पढ़ सके।

अंत में, मेरी नज़र में अच्छा स्कूल वह है जहाँ बच्चों को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि एक जागरूक, संवेदनशील, समानता में विश्वास रखने वाला और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार किया जाए।

हर स्कूल में बच्चों को संविधान, समानता, वैज्ञानिक सोच, तर्क, शिक्षा के महत्व और महान समाज सुधारकों एवं वैज्ञानिकों के योगदान के बारे में बताया जाना चाहिए। बच्चों में सवाल पूछने, अपनी बात रखने और गलत बात के खिलाफ आवाज उठाने का साहस पैदा होना चाहिए।

ऐसा स्कूल ही ऐसे नागरिक तैयार कर सकता है जो अंधविश्वास और भेदभाव के बजाय ज्ञान, तर्क, समानता, मानवता और संवैधानिक मूल्यों को महत्व दें और एक बेहतर समाज बनाने में अपना योगदान दें।

Author

  • मंजुलता मिरी / Manjulata Miri

    मंजुलता, छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। वर्तमान में मंजु, दलित आदिवासी मंच के साथ जुड़कर जल-जंगल-ज़मीन के मुद्दों पर काम कर रही हैं।

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