विकास द्वारा संकलित :
जवाहरलाल नेहरू, भारत के पहले प्रधानमंत्री, विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना के प्रति अपनी गहरी रुचि और प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। नेहरू ने आधुनिक भारत के निर्माण के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सबसे महत्वपूर्ण साधन माना। उनका मानना था कि समाज को प्रगति की राह पर ले जाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता आवश्यक है। उनके विचार में विज्ञान का उद्देश्य केवल तकनीकी विकास नहीं है, बल्कि समाज को अंधविश्वास, रूढ़िवादिता और अवैज्ञानिक दृष्टिकोण से मुक्त कराना भी है।
“वैज्ञानिक चेतना पर उनके विचार:
नेहरु ने ही हमारे भाषा (शब्द-ज्ञान) में ‘साइंटिफिक टेम्पर’ (वैज्ञानिक दृष्टिकोण) शब्द जोड़ा। वे डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखते हैं : ‘एक चीज विज्ञान के प्रयोग में लाने से भी ज्यादा जरूरी है और वह है वैज्ञानिक विधि जो कि साहसिक है लेकिन बेहद जरूरी भी है और जिससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण पनपता है यानी सत्य की खोज और नया ज्ञान, बिना जांचे-परखे किसी भी चीज को न मानने की हिम्मत, नए प्रमाणों के आधार पर पुराने नतीजों में बदलाव करने की क्षमता, पहले से सोच लिए गए सिद्धांत की बजाय, प्रेक्षित तथ्यों पर भरोसा करना, मस्तिष्क को एक अनुशासित दिशा में मोड़ना-यह सब नितांत आवश्यक है। केवल इसलिए नहीं कि इससे विज्ञान का इस्तेमाल होने लगेगा, लेकिन स्वयं जीवन के लिए और इसकी बेशुमार उलझनों को सुलझाने के लिए भी…..वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानव को वह मार्ग दिखाता है, जिस पर उसे अपनी जीवन-यात्रा करनी चाहिए। यह दृष्टिकोण एक ऐसे व्यक्ति के लिए है, जो बंधन-मुक्त है, स्वतंत्र है।’
नेहरू ने कहा था: “भविष्य उन्हीं का होगा जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपनाएंगे। विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है; यह जीवन जीने का एक तरीका है।”
नेहरु का मानना था की वैज्ञानिक चेतना का विकास शिक्षा के माध्यम से ही आमजन में किया जा सकता है। उन्होंने 1958 में संसद में एक भाषण में कहा “शिक्षा का उद्देश्य वैज्ञानिक मानसिकता और दृष्टिकोण का विकास करना है, जो हमारे जीवन और हर क्षेत्र में प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। हम चाहते हैं कि लोग जीवन की सभी समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें, प्रश्न करें, विश्लेषण करें, और समस्याओं का समाधान ढूंढ़ें।
नेहरू के विचारों से प्रभावित होकर भारतीय संविधान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) को विशेष रूप से 42वें संशोधन (1976) के तहत जोड़ा गया था। यह नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों में शामिल है। संविधान के अनुच्छेद 51A (h) में इसे स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया है: “यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और सुधार की भावना का विकास करे।”
नेहरू का बच्चों से था विशेष प्रेम :
जवाहरलाल नेहरू ने बच्चों को हमेशा प्रेरित किया और उनका मार्गदर्शन किया। उन्हें बच्चों से विशेष लगाव था और वे अक्सर उन्हें संबोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त करते थे। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा :“बच्चे, यह दुनिया बड़ी अजीब है, यह दुनिया बड़ी सुंदर है। यह महान कार्यों, नयी खोजों और बड़े विचारों से भरी हुई है। तुम्हारे सामने एक बड़ी और शानदार दुनिया है, और तुम्हें इसे समझने के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा की आवश्यकता होगी।”
“आपका जीवन एक महान और सुंदर जीवन होगा। इसके द्वारा आप अपने देश के लिए और मानवता के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं।
“मेरे प्यारे बच्चों, तुम्हें अपनी शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि तुम ही हमारे राष्ट्र के भविष्य हो। तुममें महान कार्यों को करने की क्षमता है।”
वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना :
इसलिए नेहरू ने भारत में उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों की स्थापना के लिए विशेष प्रयास किए। उनके नेतृत्व में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) की नींव रखी गई। 18 अगस्त 1956 को खड़गपुर में पहले IIT के उद्घाटन के अवसर पर दिए गए भाषण में नेहरू ने कहा :
“केवल विज्ञान ही भूख और गरीबी की समस्या, गंदगी और निरक्षरता, अंधविश्वास और मृतप्राय रीति-रिवाजों की समस्या को हल कर सकता है। यह विज्ञान ही है जो बर्बाद हो रहे विशाल संसाधनों या एक समृद्ध देश में भूखे लोगों की स्थिति को सुधार सकता है। आज के समय में विज्ञान की अनदेखी कौन कर सकता है? हर मोड़ पर हमें विज्ञान का सहारा लेना पड़ता है… भविष्य विज्ञान का है और उनका है जो विज्ञान से मित्रता करते हैं।”
नेहरू ने विज्ञान के विकास के लिए ‘वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ (सीएसआईआर) की स्थापना की, जिसके पहले निदेशक डॉ. शांतिस्वरूप भटनागर बने। उनके नेतृत्व में 20 से अधिक राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की स्थापना हुई, जिनमें राष्ट्रीय भौतिकी, रासायनिक और ईंधन प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाएँ प्रमुख हैं। नेहरू ने इन प्रयोगशालाओं को ‘विज्ञान मन्दिर’ कहा। उनके प्रयासों से परमाणु ऊर्जा आयोग, आई. एस. आई., और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों का विकास हुआ, जिसमें डॉ. होमी भाभा का भी योगदान था। नेहरू ने अंतरिक्ष अनुसंधान को बढ़ावा देते हुए डॉ. विक्रम साराभाई जैसे वैज्ञानिकों का समर्थन किया, जिससे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का आधार तैयार हुआ।
यह आलेख निम्नलिखित का संदर्भ लेकर संकलित किया गया है –
- https://hindi.news18.com/blogs/pradeep_10/jawaharlal-nehru-jayanti-special-know-about-his-science-love-3337303.html
- https://thewirehindi.com/231412/jawaharlal-nehru-science-technology-temples-of-new-india/
- https://navbharattimes.indiatimes.com/speakingtree/spirituality/what-is-nehrus-scientific-humanism/articleshow/102213029.cms
- https://junputh.com/open-space/remembering-a-scientific-statesman-jawaharlal-nehru-today/
- https://www.facebook.com/watch/?v=248693416176833
- https://thecrediblehistory.com/2023/05/what-was-nehrus-idea-of-india/

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