Site icon युवानिया ~ YUVANIYA

बीड़ा सुखथे – नागपुरी गीत 

जलेश्वर महतो:

आसार सावन भादों, होवत नखे खेत कादो,
खेत में बीड़ा सुखथे,
आरी बैठी किसान रोजे कांदथे,
कहत में बीड़ा सुखथे…… ।।1।।

खेत बारी कैसे जोती, चीमटी खेते दानथे,
हर कोड़ी धरे चितयाथे,
आरी बैठी…… ।।2।।

असरा देखी-देखी, देव पितर पुजथे,
बरखा नहीं बरसथे,
आरी बैठी…… ।।3।।

ना राती नींद लागे, ना तो भभना लागे,
टकटकी राईत बितथे,
आरी बैठी…… ।।4।।

जलेश्वर सोची-सोची, छतिया पीटी कांदथे,
भोटान जाबों लखे लागथे,
धान-मडुवा के असरा नखे,
खेत में बीड़ा सुखथे……।।5।।

शब्दार्थ:

नखे:- नहीं
कादो:- रोपा खेत का कीचड
बीड़ा:- धान की रोपाई के लिए तैयार की जाने वाली पौधे
आरी:- खेत में बने मेड
कांदथे:- रो रहे हैं
चितयाथे:- जंग लग रहा है
बरखा:- बारिश
भभना:- औंघियाना

Author

  • जलेश्वर महतो, रांची विश्विद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय (नागपुरी विभाग) के शोधार्थी हैं।

    View all posts
Exit mobile version