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ग्रामीण भारत की रीढ़ मनरेगा पर बढ़ती संकट की घंटी

युवानिया द्वारा री-पोस्ट:

ग्रामीण भारत की रीढ़ रहे मनरेगा (MGNREGA) को वर्तमान सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से कमज़ोर कर दिया है। मनरेगा केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि यह कानूनी अधिकार था, काम का अधिकार, सम्मानजनक मज़दूरी का अधिकार और ग्रामीण गरीबों के आत्मसम्मान का अधिकार।

हाल ही में भारत सरकार ने मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी कानून लाया, जिसका पूरा नाम है विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)। इस कानून के खिलाफ ग्रामीण और युवाओं के समुदाय ने आवाज़ उठाई। इसी विरोध में युवाओं ने ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ निकाली।

इस यात्रा की शुरुआत 17 जनवरी 2026 को हुई और यह 17 फ़रवरी को वाराणसी में समाप्त हुई। यात्रा में शामिल युवाओं का कहना है कि वे लगभग 250 गाँवों तक पहुंचे, और इस दौरान उन्होंने छह ज़िलों से होकर यात्रा की। उनका मकसद था कि ग्रामीण समुदाय तक मनरेगा के अधिकार और नए कानून की कमियों की जानकारी पहुँचाई जाए।

यात्रा को विपक्षी दलों के युवा संगठनों का समर्थन भी मिला। युवाओं ने बताया कि इस दौरान उन्होंने ग्रामीण लोगों से सीधे बातचीत की, उनके अनुभव सुने और बताया कि कैसे नई योजना के तहत मज़दूरों और गरीबों के अधिकार धीरे-धीरे सीमित किए जा रहे हैं।

यह यात्रा सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि ग्रामीण समुदाय की आवाज़ को सामने लाने और मनरेगा जैसी कानूनी गारंटी को बचाने की कोशिश थी। 

बीबीसी पत्रिका द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट में, आप देखेंगे कि युवाओं ने क्या अनुभव साझा किए और उन्होंने ग्रामीण लोगों के लिए किस तरह की जागरूकता अभियान चलाया।

रीपोस्ट के लिए आभार – बीबीसी न्यूज़ हिंदी

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