Site icon युवानिया ~ YUVANIYA

प्रकृति और मानवता के लिए जंगी जी का संघर्ष

शैलेश, रिंपी:

कार्य के दौरान लोगों को जानने और समझने की प्रक्रिया में जुड़ते हुए, मैंने जंगी हिंदुस्तानी का नाम सुना, जो हमेशा प्राकृतिक संरक्षण, जानवरों के अधिकारों और समुदाय के लोगों के हितों के लिए संघर्षरत रहे हैं। इस लेख के माध्यम से, हम बहराइच और जंगी हिंदुस्तानी के बारे में कुछ अनोखी बातें आपके साथ साझा कर रहे हैं। युवाओं के साथ कार्य करते हुए, मैंने अपने आसपास, प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक्सपोजर विजिट की योजना बनाई। हमारी टीम बहराइच स्थित कर्तनीय घाट की ओर निकली, जहाँ हमने जल, जंगल और ज़मीन से जुड़ी जानकारियाँ और कहानियाँ जानने के लिए जंगी हिंदुस्तानी से मुलाकात की।

जंगी हिंदुस्तानी, फखरपुर के रहने वाले हैं और जल-जंगल की रखवाली करने वाले एक समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने फखरपुर से डॉक्टर बनने के लिए कतरनिया में पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन वहाँ के रहन-सहन को देखकर उन्होंने अपना लक्ष्य बदल दिया और जल, जंगल और ज़मीन के लिए काम करना शुरू कर दिया। जंगी जी ने महसूस किया कि उनका एकमात्र लक्ष्य जंगल और उसके निवासियों के लिए काम करना होना चाहिए। वह पिछले 20 वर्षों से जल, जंगल और ज़मीन के लिए काम कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई मुश्किलों का सामना किया, जिसमें जंगल में 3 साल तक बेंच पर सोकर जीवन-यापन करना भी शामिल है। उनके पास न तो खाने के लिए पर्याप्त भोजन था और न ही पीने के लिए पानी, लेकिन उन्होंने अपना रास्ता खोजा और गाँव के निवासियों और जंगल के जानवरों के लिए काम किया। जंगी जी ने वन जीवों को अपना परिवार माना और उनकी रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। जब उन्होंने देखा कि जानवरों को वन विभाग के लोगों द्वारा मारा जा रहा है, तो उन्होंने आवाज़ उठाई। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों ने उनकी बात नहीं मानी और उन्हें बेइज्जत किया। जंगी जी ने हार नहीं मानी और लोगों से मिलते रहे, लेकिन अधिकांश लोगों ने उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया।

एक दिन, जंगी जी मिर्जापुर ऑफिस गए और अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी, लेकिन इसके परिणामस्वरूप उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। उनके ऊपर 15 से 20 मुकदमे चलने लगे और उन्हें 40 दिन जेल में बिताने पड़े। इसके बावजूद, जंगी जी ने अपने लक्ष्य के लिए लड़ना जारी रखा। जेल से छूटने के बाद, जंगी जी ने हार नहीं मानी और अपने काम को फिर से शुरू किया। उन्होंने अपने हौसले को और बढ़ाया और जानवरों और गाँव के लोगों के प्रति अपने प्यार और समर्पण को और मज़बूत किया। भवानीपुर गाँव की कहानी बताते हुए जंगी जी ने बताया कि वह वर्तमान में 26 गाँव में इसी तरह का काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य गाँव के लोगों के साथ मिलकर उनकी ज़मीन और अधिकारों के लिए लड़ना है। कई गाँव में काम चल रहा है और दो-तीन गाँव में काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कई लोगों को उनकी ज़मीन दिलवाई है और गाँव में बिजली और पानी की सुविधा भी सुनिश्चित की है। भवानीपुर गाँव की एक अनोखी परंपरा है कि वहाँ किसी के भी घर में दरवाज़े नहीं होते हैं। गाँव के लोगों ने बताया कि पहले उन्हें अपने अधिकारों के लिए बोलने का हक़ नहीं था, लेकिन जंगी जी ने उनके लिए बहुत कुछ किया है और उनकी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया है।

जंगी जी के प्रयासों से गाँव के लोगों को दो-तीन बीघा खेत उनके नाम पर करवाए गए हैं। गाँव में अधिकांश घर मिट्टी की दीवारों और फूस से बने हुए हैं, लेकिन हाल ही में दो लोगों ने पक्की दीवारें बनवाई हैं। गाँव के लोग बेरोज़गारी के कारण पलायन करते हैं और खेती के मौसम में वापस आते हैं। 2022 में गाँव के लोगों को खेती की रजिस्ट्री मिली थी और मुख्यमंत्री जी ने गाँव के चार लोगों को सम्मानित भी किया था। गाँव में बिजली का बिल कमिटी के माध्यम से जमा किया जाता है, जिसमें प्रति व्यक्ति 70 रुपये देने पड़ते हैं।

भवानीपुर गाँव को 15 जुलाई 1898 में रियासत गाँव के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी। इस तरह के 26 गाँव हैं, जिनमें लगभग 23,000 लोग रहते हैं। हाल ही में 6 और गाँवों को मान्यता प्राप्त हुई है, लेकिन अभी भी वहाँ के लोगों को वोट देने का अधिकार नहीं है। काम के दौरान अब ग्राम पंचायत बनने का आदेश आया है, जिससे गाँव के लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने का एक नया अवसर मिलेगा।

आदिम युगीन गाँव एक ऐसा गाँव है जहाँ टाइगर और अन्य जानवर लोगों पर हमला नहीं करते हैं, बशर्ते लोग उन्हें परेशान न करें। गाँव के लोग अक्सर जानवरों को परेशान करते हैं क्योंकि वे उनके जीभ में होने के कारण लवण चाटने के लिए जाते हैं। बाघ आमतौर पर हमला नहीं करते हैं, लेकिन जब उन्हें रास्ता नहीं मिलता है तो वे लोगों पर हमला कर देते हैं। जानवर गाँव के लोगों से परेशान होकर पलायन करने पर मजबूर हो जाते जंगी जी ने गाँव वालों से संवाद किया और उन्हें जानवरों के प्रति सहानुभूति का मूल्य बनाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि कतरनिया जंगल में कागज़ों के हिसाब से 58 शेर, 23 हाथी और 25 टाइगर हैं, लेकिन वास्तव में बहुत सारे जानवर हैं जिनका लिखित प्रमाण नहीं है।

बातचीत के दौरान, जंगी जी ने बताया कि टाइगर चार भाई होते हैं – पैंथर, बाघ, तेंदुआ और अन्य। उन्होंने बिग बैंग थ्योरी की कहानी भी सुनाई, जिसमें ब्रह्मांड के निर्माण की कहानी कद्दू के आकार के विस्फोट से जुड़ी हुई है। इस कहानी के अनुसार, कद्दू के आकार का ब्रह्मांड विस्फोट हो गया और उसके बीज चारों तरफ फैल गए, जिससे सूर्य, पृथ्वी और समुद्र का निर्माण हुआ। जलीय जीवों की उत्पत्ति मछली के रूप में हुई, फिर कछुए और सूअर ने जन्म लिया। यह पूरी प्रक्रिया 12 अवतारों में हुई। जंगी जी ने हमें कर्तनीय घाट के मजरा के पास स्थित कैलाशपुरी नदी की अनोखी कहानियाँ सुनाईं। यह नदी कई सारी नदियों को जोड़ती है और 22 जिलों को सिंचित करती है। शारदा आयोजन महर रायबरेली पहुंचते हुए अन्य के उत्पादन को उत्पादित करती है। इसके अलावा कौडाली पश्चिम भारत से प्रवेश करने के बाद दोनों नदियां वैराज में एकजुट होती हैं और गंगा नदी के साथ बांग्लादेश में प्रवेश करती हैं।

जंगी जी ने हमें जंगल की कुछ अनोखी कहानियाँ भी सुनाई, जैसे कि राजा बलभद्र सिंह की कहानी, जो 14 साल की उम्र में राजा बन गए थे और 12000 सैनिकों के साथ लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने बताया कि पहले के समय में बलुथ के जंगल होते थे और अंग्रेज़ों का नाम रहता था, जिन्होंने पूरी वसीयत विरासत और रजिस्ट्री रखी थी। जंगल में घूमते हुए, जंगी जी ने हमें दो पेड़ों की कहानी सुनाई, जो एक दूसरे के साथ अनबन में रहते थे। एक पेड़ बड़ा हो गया और दूसरे को दबा दिया।

जंगी जी ने अपने अनुभवों के बारे में भी बताया कि कैसे उन्होंने जड़ी बूटियों को समझने की कोशिश की और रिसर्च किया। उन्होंने देसी दवाइयां और हैंड वॉश, पायरिया का मंजन, लिवर फैटी चूर्ण जैसी चीजें बनाई। कर्तनीय घाट भ्रमण के दौरान, हमने जंगी जी से वहाँ के रहन-सहन, जल-जंगल-ज़मीन पर बातचीत की और पूरे दिन गाँव वालों के साथ रहकर उनकी ज़िंदगी को महसूस किया। हमें हमेशा अपने आसपास के बारे में जानने की कोशिश करनी चाहिए और लोगों से मिल-जुल कर उनके अनुभवों को समझना चाहिए।

Authors

  • शैलेश, उत्तर प्रदेश से हैंl वर्तमान में शैलेश सरजू फाउंडेशन के साथ जुड़कर उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले में काम कर रही हैंl वह महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के साथ शिक्षा, आजीविका और संविधान से जुड़ी गतिविधियों के अंतर्गत कार्य करती हैंl शैलेश को कविता और कहानी लिखना अच्छा लगता हैl

    View all posts
  • रिंपी बहराइच जिले, उत्तर प्रदेश से एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह वर्तमान में अर्थशास्त्र में एमए कर रही हैं और सरजू फाउंडेशन के साथ जुड़कर युवाओं और बच्चों के साथ शिक्षा और संविधान के क्षेत्र में काम कर रही हैं। रिंपी को कहानी पढ़ना, घूमना, गाने सुनना और नई चीजों को खोजकर लिखना पसंद है। वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और युवाओं को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    View all posts
Exit mobile version