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सपनों के ऊपर सपना: कोडरमा झारखंड के प्रवासी मज़दूर गुड्डू सिंह की कहानी

रोजालिया तिर्की:

गुड्डू सिंह, उम्र 28 वर्ष, नवाडीह थाना, मरकचो जिला कोडरमा झारखंड का स्थाई निवासी है। पिछले दिनों परिवार की माली हालात ठीक नहीं होने के कारण गुड्डू रोज़गार की तलाश में अधिक पैसे कमाने का सपना लेकर सिकंदराबाद, हैदराबाद (तेलंगाना) गए। पत्नी गंगा देवी ने भी पति के बाहर कमाने जाने के बाद अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने व उनकी परवरिश अच्छे से करने का सपना संजो लिया।  

तेलंगना पहुँचने के बाद गुड्डू को वहाँ एक व्यापारी सरदार के पास काम करने का मौका मिला। गुड्डू अपने काम के प्रति काफ़ी ज़िम्मेदार और वक्त के पाबंद थे। सरदार भी गुड्डू सिंह के काम के प्रति उसकी लगन को देख काफी खुश था। सरदार भी सोचने लगा कि काफी दिनों बाद एक व्यक्ति मिला है जिसे मैं अपने इच्छा के अनुसार हाँक सकता हूँ। सरदार भी अपना सपना सजाने लगा कि मेरा व्यापार काफी अच्छा हो जाएगा और मैं ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाऊँगा।  मालिक और मज़दूर दोनों ही अपने-अपने सपने के निशाने पर दौड़ने लगे थे। काफी दिन पूरे होने पर गुड्डू सिंह ने मालिक से बात कर अपने घर लौटने की इच्छा जतायी। काफी दिनों से उसे घर आने नहीं दिया जा रहा था और पिछले तीन महीने से उसे मज़दूरी का भुगतान भी नहीं किया गया था। 

गुड्डू सिंह ने एक दिन अचानक अपने परिवार में फोन द्वारा बात कर घर वापसी का टिकट बुक कर लेने की सूचना दी। निकलने से पूर्व उसने फोन से 11 बजे रात घर में बात किया कि मैं घर आ रहा हूँ और वह अपना सारा समान लेकर रेल गाड़ी में बैठ गया। लेकिन दूसरे दिन से उसका फोन बंद हो गया। इससे पहले मालिक से बकाया राशि भुगतान को लेकर उसकी कहासुनी भी हुई थी। संपर्क न होने से घबराए हुए परिवार ने गुड्डू की सकुशल वापसी हेतु स्थानीय थाने में मामला भी दर्ज करा दिया। 

गुड्डू सिंह के अनुसार जिस रात उसने अपने परिवार से बात किया था, उसी रात वह तेलंगना से ट्रेन में बैठ कर घर आ रहा था। ट्रेन में दो बदमाशों ने उनका मोबाईल फोन और कमाई का सारा पैसा छीन लिया और उसके साथ काफी मार-पीट की। इतना ही नहीं नासिक के रास्ते उसे ट्रेन से उतार कर एक कच्चे छप्पर वाले घर में एक महीने तक आधा पेट खाना दे कर और मुँह बंद कर के रखा गया। इधर बदमाशों ने भी यह सपना सजाना शुरू कर दिया कि लंबे समय तक बैठे-बैठे काफी पैसे कमा लेगें। गुड्डू सिंह के द्वारा घर वालों से वह 2000/- करके दो बार पैसे मंगवा भी चुके थे। एक दिन ऐसा हुआ कि दोनों बदमाश घर पर नहीं थे, तो गुड्डू सिंह ने काफी मेहनत-मशक्कत से घर की छप्पर तोड़कर ऊपर से चढ़कर भाग निकला और आस-पास के लोगों से मदद मांगी। पास के किसी होटल वाले के फोन से गुड्डू ने घर में बात कर आपबीती कह सुनायी। तब परिवार वालों ने किसी रिश्तेदार को भेजकर नासिक (महाराष्ट्र) से उसे झारखंड वापस लेकर आए। घर आने के बाद गुड्डू की शारीरिक और मानसिक स्थिति बिल्कुल सही नहीं थी। तुरन्त स्थानीय अस्पताल में उसका इलाज करवाया गया। वहीं पत्नी, परिवार और गुड्डू का सपना धरा का धरा रह गया।

फीचर्ड फोटो प्रतीकात्मक है।

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  • रोजालिया, झारखण्ड से हैं। वे पिछले दो दशकों से महिलाओं के मुद्दे, शहरी बस्तियों के मुद्दे और मज़दूरी के सवालों पर निरंतर काम कर रही हैं। रोजालिया ने अन्य कुछ महिलाओं के साथ सामूहिक रूप से जावा (झारखण्ड आदिवासी विमेंस एसोसिएशन) नामक संस्था बनाई जो आदिवासी महिलाओं के सवालों पर सतत काम कर रही है।

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