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मौसम ख़ुशगवार है – कविता

हफ़्सा नाज़:

सुना है मौसम बहुत ख़ुशगवार है
सुना है मौसम बहुत ख़ुशगवार है।।
उनके लिए जिन्हें मौक़ा मिल गया है
खुलेआम रेप की धमकी देने का
क़त्ल का बदला क़त्ल से लेने का
अपने मन की गंदगी को बाहर निकालने का
गुनाह करके ख़ुद को सही कहने का
सुना है उन लोगों के लिए, उस भीड़ के लिए
मौसम ख़ुशगवार है, मौसम ख़ुशगवार है।।

सोशल मीडिया पर हर तरफ़ बारिशें ही बारिशें हैं,
इतना हसीन मौक़ा जो मिल गया है।।
अपनी जिहालत को फैलाने का
झूठी बातों को आगे बढ़ाने का
टेक्नोलॉजी का ग़लत उपयोग करने का
नफ़रतों के बीज दिलों में बोने का
उस सोच, उस बदख़्याली राहों के लिए
बटवारे की रिमझिम बारिश कराने के लिए
मौसम ख़ुशगवार है, यह मौसम ख़ुशगवार है।।

दिलों की नफ़रतों को ज़ुल्म करके निकला जा रहा है
इस बदलाव को बहुत-सी दलीलों से सराहा जा रहा है।।
हर दिन की जुस्तजू में फंसा है इंसान यहाँ
कश्मकश है ज़िंदगी में, परेशानी हर तरफ़ है यहाँ।।

बस यही सोच दिलों को तसल्ली दिए जा रहे है
नाखुश हूँ मैं तो ग़म तो उसे भी मिल रहे हैं।।
तो क्या हुआ अगर नुक़सान थोड़ा मेरा आज है
कल के दिन तो बस अपना ही राज है।।
उस कल की कल्पना में आज ख़तम किए जा रहे हैं
जो आना नहीं है कभी कल, बस उसे सोचे जा रहे हैं।।

झूठे अरमानों को लिए माहौल ख़राब करने में मगन हैं
चंद पैसों के लिए ज़मीर बेचने में व्यस्त हैं।।
एक ओठ में बैठकर, धमकियों की दे रहे बौछार हैं
दावे हैं बहुत से इनके पास, मगर सब बेकार हैं।।
फिर भी रात में यह सुकून से सो जाते हैं
बस यहीं सोच दिलों को तसल्ली दिए जा रहे हैं कि
मौसम ख़ुशगवार है, यहाँ मौसम ख़ुशगवार है।।

Author

  • हफ्सा नाज़ उत्तर प्रदेश की रहने वाली है और पिछले पांच सालो से युवाओ और महिलाओं के साथ कार्य कर रही है । हफ्सा को महिलाओ और युवाओ के विषय पर लिखना पसंद है ।

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