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सुकून में कोई भीड़ न हो – एक कविता

छोटूसिंह रावत :

जहाँ न भीड़ हो, न शोर हो,
बस हवाओं में ख़ामोशी का जोर हो,
उस जगह पर हम हों।
जहाँ पेड़ों की सरसराहट बोले,
पक्षियों की प्यारी-सी धुन हो,
और दिल की हर थकान में सुकून हो।
जहाँ ज़मीन नरम हो,
आसमान गहरा नीला हो,
प्रकृति की कोई शांत-सी जगह हो।
हर साँस लगे जैसे सब अपना हो।
न दौड़ हो, न समय का डर,
ना काम का कोई भारी शोर हो,
बस खुद से मिलने का हो सफ़र।
न चाह हो कुछ पाने की,
न चिंता हो कुछ खो जाने की,
ना पैसों का कोई मोल हो।
ना किसी से कोई जलन हो,
जहाँ दिल हो और दिमाग मौन हो,
हर लम्हा बने एक सुंदर कोना हो।
शायद वो जगह किसी पहाड़ या जंगल में हो,
जहाँ ठहरे हर सोच का समंदर हो।
हर ओर पानी, हरियाली हो,
वो जगह हमारे दिल के अंदर हो।
जहाँ भीड़ न हो —
बस वहीं सुकून हो।

Author

  • छोटू सिंह, राजस्थान के अजमेर से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वे असंगठित श्रमिक और बच्चों के साथ ज़मीनी स्तर के मुद्दों पर कार्यरत हैं और वर्तमान में सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन के साथ जुड़ कर काम कर रहे हैं।

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