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रांची में लगता है, हर दिन मज़दूरों का बाज़ार

कोर्दूला कुजूर:

रांची की विभिन्न जगहों पर मज़दूरों का बाज़ार लगता है। यह सुनने में थोड़ा अटपटा सा लगता है, पर सच्चाई यही है। यहाँ प्रतिदिन अहले सुबह, सात बजे से लेकर दस बजे तक मज़दूरों का बाज़ार सजता है। इस बाज़ार में रांची से लगभग 45 से 50 किलोमीटर दूर तक के मज़दूर आते हैं। ये बाज़ार शहर के लगभग सभी दिशाओं में अर्थात शहर के सभी एंट्री पॉइंट-चौराहों पर लगता है। 

रांची के पिस्का मोड़, लाह कोठी, रातू रोड, चांदनी चौक, कांके चौक, किशोरगंज चौक, हरमू चौक, हरमू पावर ग्रिड, कडरू, डोरंडा बाज़ार, हिनू, बिरसा चौक, धुर्वा, बरियातू, बूटी मोड़ तथा लालपुर में सुबह से ही मज़दूरों का आना शुरू हो जाता है। जिन्हें मज़दूरों की आवश्यकता होती है वे इन जगहों से मज़दूरों को ले जाते हैं। घरेलू काम से लेकर सभी तरह के कार्यों के लिए उन्हें लिया जाता है। दलालों के द्वारा सबसे अधिक बिल्डिंग निर्माण और केबल बिछाने जैसे कार्यों के लिए मज़दूरों को लिया जाता है। कई बार मज़दूरों को काम मिल जाता है, तो कई बार काम नहीं मिलने से बैरंग वापस लौटना पड़ता है। ऐसे समय में कभी-कभी उनके पास घर लौटने का पैसा भी नहीं होता है और उनके चुल्हे भी नहीं जलते हैं। कई बार काम के नाम पर वे दलालों के चंगुल में भी फंस जाते हैं, जहाँ उनका शोषण किया जाता है। सरकारी रेट से भी कम में उनसे काम कराया जाता है। विरोध करने पर खाली हाथ भी वापस लौटना पड़ता है, इसलिए वे कम पैसों में भी काम कर लेते हैं।

महिलाएँ इसमें सबसे अधिक पिसती हैं। पिछले कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन के कारण अति वृष्टि और अनावृष्टि से कृषि पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है, ऐसे समय में किसान, मजबूरी में शहर का मज़दूर बनकर काम करने को विवश हैं। 

झारखंड सरकार के द्वारा मज़दूरों के हितों में बने श्रम कानून को प्रभावी बनाने के लिए, यहाँ कई योजनाएँ  चलाई जा रही हैं। झारखंड में सबसे अधिक असंगठित क्षेत्र के मज़दूर हैं, जिसमें सबसे अधिक श्रमिक कृषि क्षेत्र में हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, असंगठित क्षेत्र में करीब एक करोड़ 30 लाख मज़दूर हैं। इनमें से 95 लाख निबंधित हैं। इन मज़दूरों का निबंधन इश्रम पोर्टल के माध्यम से लगातार किया जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि श्रमिकों के निबंधन से इन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा और सरकार के पास आंकड़े भी उपलब्ध रहेंगे। राज्य सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की हैं, जैसे –

झारखंड भवन और अन्य कल्याण बोर्ड द्वारा निबंधित मज़दूरों के लिए भी कई प्रावधान दिए गए है। इसके तहत निबंधित मज़दूरों हेतु:

इसके अलावा सरकार की ओर से और कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिसमें मुख्य रूप से – साइकिल सहायता योजना, चिकित्सक सहायता योजना, चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजना, विवाह सहायता योजना, पेंशन योजना, पारिवारिक पेंशन योजना, नि:शक्तता पेंशन योजना, झारखंड निर्माण कर्मकार मृत्यु/दुर्घटना सहायता योजना तथा अन्त्येष्टि सहायता योजना शामिल है। महिलाओं के साथ अधिक जुड़ाव होने के कारण, उनसे बात करने के क्रम में पता चलता है कि अभी भी अधिकांश लोग इन योजनाओं से वाकिफ ही नहीं हैं। यह उनकी उदासीनता है या फिर कुछ और।

बहरहाल सरकार की इन योजनाओं को मज़दूरों तक पहुंचाने के लिए अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना होगा गाँवों और कस्बों में। इन योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान चलाना होगा, तभी सब मज़दूर इन योजनाओं का पूरा-पूरा लाभ ले पाएंगे।

Author

  • कोर्दुला कुजूर आदिवासी एक्टिविस्ट हैं और रांची, झारखंड में रहती हैं। महिलाओं और बच्चों के सवालों पर वह लंबे समय तक काम करते आ रही है और झारखंडी आदिवासी वुमेन्स एसोशियन शुरुआत करने में प्रमुख भूमिका निभाई हैं। साथ ही झारखंडी आदिवासियों के भाषा आंदोलन के सहभागी बनकर कुड़ुख भाषा को बचाए रखने का महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आयी हैं।

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