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नारी हो तुम नारी

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मैत्री शर्मा :

नारी हो तुम नारी
सारी गलती है तुम्हारी
इस नारी देह में जन्म लिया
क्यूँ न इसे ठुकरा दिया।
तुम क्यों हो नारी
ये भी गलती है तुम्हारी
याद रखो, बेटी हो बेटी की तरह रहना
कभी बेटों से बराबरी की तो मत ही कहना
तुम्हे ना पढ़ाना है ना लिखाना है
क्योंकि तुम्हें तो दूसरे घर ही जाना है
तुम्हारी पढ़ाई आखिर हमारे किस काम की
याद रखना, तुम्हारी सीमा है वो घड़ी शाम की
तुमने जो सीमा तोड़ी तो पछताओगी
खुद को बचा भी ना पाओगी
कुछ लोग मिलकर
ताकतवर बनकर
तुम अकेली हो
कमज़ोर हो
ये तुम्हे बताएंगे
और बेशर्मी की सारी सीमा को पार कर जाएंगे
यहाँ भी कुछ तो गलती है तुम्हारी
याद करो एक घड़ी को ना माना था
तुम्हे ध्यान रखना था
क्योंकि नारी हो तुम नारी
सारी गलती है तुम्हारी
जब पति घर होश में ना आए
और तुम पर अपना पुरुषत्व दिखाए
फिर भी गलती है तुम्हारी
क्योंकि तुमने अपने पत्नी धर्म ना निभाए
नारी हो तुम नारी
सारी गलती है तुम्हारी
याद रखो,
सारे नियम, सारे कायदे
सारी कसमें, सारे वायदे
तुम्हारे लिए हैं
समाज की तिरछी नज़रें
तुम्हारे लिए हैं
राह की टिप्पणियां
तुम्हारे लिये हैं
घर के सब काम
तुम्हारे लिये हैं
चरित्र में कमी
तुम्हारे में है
सारी कमियाँ
तुम में हैं
सारी गलतियाँ हैं तुम्हारी
क्यों? क्योंकि नारी हो तुम नारी

Author

  • मैत्री मध्य प्रदेश के इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर में बीएएलएलबी की द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह एक सक्रिय छात्रा है और हमेशा विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में भाग लेती है। वह कईं एक्टिविटीज में रूचि रखती हैं जैसे - कविता, भाषण, खेल आदि। उन्हें साहित्य परिषद, ग्वालियर द्वारा सूर्य कांत त्रिपाठी निराला श्रीजक सम्मान से सम्मानित किया गया है और उन्होंने कुछ अन्य कविता और निबंध प्रतियोगिताएं भी जीती हैं। वह एक आईएफएस अधिकारी बनने का लक्ष्य रखती है।

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