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आओ, संग बैठे धरती आबा – कविता

वंदना टेटे:

डेमटा की चटनी
और छिलका रोटी
लेकर हम बैठे हैं आबा
तुम्हारे साथ खाने के लिए
आओ आओ
जब तक कि तीर बन रहे हैं
टांगियों पर धार चढ़ रहे हैं
ढेलफांस बुने जा रहे हैं
आओ
हमारे संग बैठ लो
हमारे संग बतिया लो
डेमटा की चटनी
और छिलका रोटी खा लो
आओ धरती आबा
हम सब तुम्हारे बच्चे
आज के दिन तुमको गोहारते हैं
आज के दिन तुमको याद करते हैं
आज के दिन उलगुलान को
अपने जबड़ों में कसकसाते हैं
छातियों में महसूसते हैं

इस पोस्ट के लिए हम वंदना टेटे जी (कविता और पोस्टर के लिए) और किताबगंज को आभार देते हैं I

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