Site icon युवानिया ~ YUVANIYA

आदिम संताल – संथाली कविता

पतिचरण मुर्मू:

आदिवासी संताड़ सामाज कहानी।
आबो संताड़ को ताहेंकाना राजा, रानी ।।
ताहेंकाना को किसकू समाज।
दिशोमरे ताहेंकाना अनकुवाः राज।।
ताहेंकाना आबोवाः चाईगाड़।
ताहेंकाना आबोवाः चाम्पागाड़।।
आबोवाः गे ताहेंकाना कश्मीर।
ओनागे ताहेंकाना काशीबीर।।
सेदाय ताहेंकाना होड़ रापाः ।
ओनागे नितो हड़प्पा।।

आबोवाः संताड़सोमाज हाहाड़ागेया।
ना:ह कोड़ा पे हिडीञ केद दोया।।
श्राबोवाः सोमाज मेनाआ, घोरोम मेनाआ
आबो संताड़ ओल मेनाआः रोड मेनाआ

देला बों लोगोनोआ
आदो बाबोन तायोमोआ
आसे संताड़ ओल मेनाः तासे रोड मेनाः तासे
आदो बाले ताहेंन दिन दो हाले डाले

Author

Exit mobile version