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मई दिवस: संघर्ष, स्मृति और आज के मज़दूरों की आवाज़

समित कुमार कर:

01 मई से जुड़ी ऐतिहासिक पृष्ठभूमिः

उद्देश्यः यह दिन उन लाखों मज़दूरों के बलिदान को सलाम करने का है, जिन्होंने कार्य दिवस को 12-14 घंटे से घटाकर 8 घंटे करवाया। आज यह दिन न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा, संविदा (ठेका प्रथा) के उन्मूलन और कार्यस्थल पर सुरक्षा की माँग का वैश्विक प्रतीक है।

भारत में मई दिवस: गारवेलु चेट्टियार नाम के एक प्रभावी कम्यूनिस्ट नेता के सुझाव पर पहली बार वर्ष 1923 में भारत में मई दिवस मनाया गया। मद्रास में मई दिवस मनाने की अपील की गई। इस अवसर पर वहां कई जनसभाएं और जुलूस आयोजित कर मजदूरों के हितों के प्रति सभी का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया। उनका कहना था कि दुनिया भर के मजदूर इस दिन को मनाते हैं, तो भारत में भी इसकी शुरुआत की जानी चाहिए।

डॉ. बी आर अम्बेडकर महत्वपूर्ण श्रम कानूनों के रूपकार हैं और उन्होंने भारत में, देश स्वतंत्र होने के पहले 1937-1938 में ब्रिटिश सरकार के वाइसरॉय को अपनी ज़िद एवं तर्क से श्रमिकों के लिए 14 घंटे से 8 घंटे कार्य समय निर्धारित करवाया था।

ववर्तमान परिप्रेक्ष्य में देश में चल रहा मज़दूर आंदोलन ही मई दिवस की प्रासंगिकता को ज़िंदा रखे हुए है। भारत के विभिन्न राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, पंजाब) में चल रहे मज़दूर आंदोलनों में श्रमिक मुख्य रूप से वेतन वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा और श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 2026 की शुरुआत में, नोएडा-मानेसर औद्योगिक क्षेत्र से लेकर रांची तक मज़दूर अपनी मांगों के लिए सड़कों पर हैं।

मज़दूर आंदोलनों में शामिल श्रमिकों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

1. मुख्य आर्थिक और कार्य संबंधी मांगें:

2. सामाजिक सुरक्षा और कानूनी मांगें:

3. अन्य विशिष्ट मांगेंः

आंदोलन के प्रमुख क्षेत्र और कारणः

संक्षेप में, ये आंदोलन “महंगाई के दौर में उचित वेतन और सुरक्षित भविष्य” की लड़ाई है।

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  • समित कुमार कर, जमशेदपुर से हैं। वे एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और पिछले 20 वर्षों से झारखंड व पश्चिम बंगाल में सिलिकोसिस से पीड़ित मज़दूरों के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। वे Occupational Safety and Health Association of Jharkhand (OSHAJ) से जुड़े हुए हैं।

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