Site icon युवानिया ~ YUVANIYA

नौकरी सिर्फ जीवन नहीं होती – एक कविता 

नंदिनी शर्मा:


नौकरी जीवन का एक हिस्सा है,
पर पूरा जीवन नहीं।।
यह बात जानते हुए भी
हम काम के बीच कहीं इसे भूल जाते हैं।।
हर सुबह अलार्म के साथ
ज़िंदगी जागती है,
और ज़िम्मेदारियाँ साथ चल पड़ती हैं।।
कैलेंडर बैठकों से भरा रहता है,
लेकिन अपने लिए समय
हमेशा “बाद में” टल जाता है।।
हम रोज़ और मज़बूत दिखने लगते हैं,
पर भीतर से
थोड़े-थोड़े कमज़ोर भी होते जाते हैं।।
अपने बायोडाटा में उपलब्धियाँ लिखते हैं,
लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि –
थकान –
कभी दर्ज नहीं करते।।
मुस्कान भी अब पेशेवर हो गई है,
और स्वयं से मिलना
एक विलासिता बन चुका है।।
नौकरी हमें आत्मविश्वास दे सकती है,
पहचान दे सकती है,
लेकिन हमारा मूल्य तय नहीं कर सकती।।
वह हमारी पहचान नहीं बन सकती।।
वेतन बिल चुका सकता है,
सुरक्षा दे सकता है,
लेकिन थकान, भय और मौन को
हटाकर सुकून नहीं दे सकता।।
यदि एक दिन
सब कुछ सही करते-करते
नौकरी छूट जाए,
तो भी जीवन चलता रहेगा।।
पर यदि उसी दौड़ में
हम स्वयं को ही खो दें,
तो उपलब्धि, वेतन और सुरक्षा
सब निरर्थक हो जाएंगे।।
अर्थ तब भी रहेगा
तो केवल उन स्मृतियों का,
उन खुशियों का,
जिन्हें नौकरी की आपाधापी में
हम रच ही नहीं पाए –
और स्वयं से मिलने को भूल गए।।
इसलिए याद रखिए, हमेशा –
नौकरी एक अध्याय है,
आप पूरी कहानी हैं।।

Author

  • नंदिनी शर्मा बदरपुर, दिल्ली में रहती हैं । वह अभी बी.ए. सेकेंड ईयर और सॉफ्टवेयर डेवलपर का कोर्स कर रही हैं। उन्हें लड़कियों और युवाओं के मुद्दों पर लिखना पसंद हैं जिसको वह कविताओं के माध्यम से व्यक्त करती हैं।

    View all posts
Exit mobile version