(राग – रंग)
जलेश्वर महतो:
बाड़ली सेयान भेली,
घर दूरा छोड़ी देली,
पढ़ली लिखली हायरे,
नोकरी नही पाली…… ।।1।।
सरकारक सासन देखी,
दिला घबराय नी रे,
जेकर आहे कचिया भारी,
नोकरी सेखे मिली…… ।।2।।
धरना देली लाठी खाली,
मुड़ कापार फोरी लेली,
अंदर बहिरा रे सरकार नही सूनी…… ।।3।।
संग संगवारी गांवे,
असरा देखत होबंय,
का मूंहें जामूं रे,
रोजगार नहीं पाली…… ।।4।।
आइयो के गहना बेचाल,
बाबा के अरमान नी रे,
जलेश्वरक सपना, सपना रही जाथे…… ।।5।।
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जलेश्वर महतो, रांची विश्विद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय (नागपुरी विभाग) के शोधार्थी हैं।

