शबनम:
राजस्थान के सिरोही जिले में वालोरिया नाम का गाँव है जिसमें भील समुदाय के लोग रहते हैं। इस गाँव की एक घटना दिल को छू जाने वाली है, बलौरिया में पहले पुलिस चौकी थी जिसमें पुलिस रहती थी। पुलिस अपने पास बहुत सारी गायों को रखा करती थी और रोज़ उन गायों को दूसरों के खेतों में चराने के लिए छोड़ दिया करती थी। इससे फसलों को बहुत सारा नुकसान पहुँचता था और इसके बाद उन्हें लगान भी अंग्रेज़ सरकार को अलग से देना पड़ता था। जब लोग इसका विरोध करते तो उन्हें बेवजह मारा जाता था और यह पुलिस का रोज़ का काम बन गया था। जब इन समस्या को मोतीलाल तेजावत ने सरकार के सामने उठाया तो अंग्रेज़ों ने उल्टा उन्हें ही धमकाया।
इसके बाद सारे आदिवासियों ने पुलिस चौकी में आग लगा दी और सारे लोग लिलुड़ी बड़ली जाकर एकत्रित हो गए। जब अंग्रेज़ों को इस घटना का पता चला तो बहुत बड़ी संख्या में पुलिस दल वहाँ पहुँचा और अंग्रेज अफसर ने बिना सोचे-समझे गोलियाँ चलवा दी, इसके कारण 300 लोगों की जान चली गई। यह घटना 6 मई 1922 की है, तभी से इस जगह को राजस्थान के जलियाँवाला बाग की तरह याद किया जाता है और अंग्रेजों के खिलाफ बहुत बड़े आदिवासी आंदोलन के स्थल के रूप में जाना जाता है। आज भी 6 मई को यादगार दिन के रूप में मनाया जाता है और आज भी इस गाँव को चोरों का गाँव कहाँ जाता है।
यह घटना एक सत्य घटना है इस जगह पर हर वर्ष शहीद हुए महान आदिवासी लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस श्रद्धांजलि में पूरा भील समाज शामिल होता है। पॉलीटिकल लीडर्स द्वारा यहाँ एक स्मारक बनाकर उसका शिलान्यास भी किया जा चुका है। बलौरिया का अभी भी वह एक व्यक्ति जीवित है, जिसका पूरा परिवार इस दौरान खत्म हो गया था।

