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शिक्षा का अधिकार?

अमित:

हमारे पड़ोसी के दो बेटे राहुल और शिवम अपनी तीन बकरियाँ हमारे खेत के किनारे चरा रहे थे। मैं उनके पास गया तो था, थोड़ा डांट कर बताने कि खेत में न घुसाएँ बकरियाँ, लेकिन फिर उनका प्यारा सा कटोरा कट हेयर स्टाइल देख कर बातों में लग गया। “बाल बड़े अच्छे कटे हैं रे तुम्हारे! स्मार्ट लग रहे हो। स्मार्ट समझते हो? नहीं। बहुत अच्छे लग रहे हो। कहाँ से कटिंग करवाई है?” बच्चे खुश हो गए तारीफ सुन कर।

काका ने काटे हैं – मेरे पापा का भाई। सब तरह की कटिंग बना देता है वो। राहुल की आवाज़ में जोश आ गया था। 

वाह, तुम्हारा काका तो बहुत कलाकार है। ये बकरियों में रस्सी क्यों बंधी है?

राहुल ने बताया कि रास्ते में इधर-उधर भाग जाती हैं तो पकड़ कर लाना पड़ता है। सब बच्चे तो ऐसे ही झुंड में ले जाते हैं, बिना बांधे? ये मानती नहीं हैं।

ये तुम्हारी हैं? (यहाँ बच्चों की बकरियाँ, मुर्गियाँ होती हैं।)

हाँ, ये एक मेरी है और वो दो शिवम की। एक ने बच्चा दे दिया है कल ही और ये वाली का भी होने वाला है।

तो बकरी का दूध निकालते हो?

नहीं, वो उसका गिदलिया (बकरी का बच्चा) पीता है। बकरा है, दूध पिएगा तो ही मोटा होगा।

तेरी बकरी मतलब तुझे पूछ कर बेचेंगे?

हाँ।

फिर तू क्या कहेगा?

हौ बोल दूंगा! 

हम दोनों को हँसी आ गई।

बच्चे साफ-सुथरे और थोड़े ठीक-ठाक कपड़े पहने थे तो पूछा कि स्कूल-वूल जाते हो क्या? 

हाँ।

कौन सी क्लास में हो?

वो पहली में है और मैं सातवीं में।

सातवीं सुनकर मैं थोड़ा हैरान था। छोटा सा दिख रहा था, सातवीं में? इतना सा तो है तू! पढ़-लिख लेता है?

हाँ! 

मैने सोचा ज़रा देखता हूँ, कैसा पढ़ता है। मैने मोबाइल पर कुछ हिंदी में लिखा टेक्स्ट दिखाया। इतना सारा देख कर वो थोड़ा घबरा गया और बोला कि यह नहीं पढ़ सकता।

फिर मैंने थोड़े बड़े अक्षरों में लिखे दो शब्द दिखाए – शेर और बकरी

चुप चाप सिर हिलाया उसने। उसकी आँखें नम हो गई। शायद उसे शर्म आई या अपमानित होने का अहसास हुआ। 

राहुल ने आंखों में पानी लिए कहा – मेरे मम्मी-पापा मज़दूरी करने चले जाते हैं महाराष्ट्र में, तो मुझे छोटे भाई बहनों को रखने के लिए बोल देते हैं, इसलिए मैं स्कूल नहीं जा पाता बहुत से दिन।

मुझे भी बुरा लगने लगा और सोचने लगा कि इससे नहीं पूछना चाहिए था। मुझे पता तो है कि शिक्षा का क्या हाल है। शायद इतना प्यारा बच्चा था कि लगा ये पढ़ ही लेता हो।

वो अपने छोटे भाई के साथ बकरियों को गेर कर आगे बढ़ लिया।

पीछे से मैंने कहा कि जब भी तू काम से छूटेगा तो बस्ता लेकर आ जाना। मैं सिखा दूंगा।

मुझे पता है वो नहीं आएगा….।

फीचर्ड फोटो प्रतीकात्मक है। फोटो आभार: द न्यूज़ मिनट

Author

  • अमित, सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं और मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले में एक वैकल्पिक शिक्षा के प्रयोग पर शुरू हुआ स्थानीय स्कूल - आधारशिला शिक्षण केन्द्र चलाते हैं।

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