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विश्व पर्यावरण दिवस – कविता

रासमनी तांती:

आज है विश्व पर्यावरण दिवस

क्या आन पड़ी मनाने को पर्यावरण दिवस 

जो हो गये मानव पेड़-पौधे लगाने को विवश

प्रकृति से करते हैं छेड़छाड़, पूरा करने अपनी दिल की हवस

पर्यावरण करता है सबका भरण-पोषण

इसलिए ना करना तू इसका शोषण 

सदाबहार हो चाहे पतझड़ समशीतोषण

करता है हर वक़्त जीव कल्याण हर छण

पेड़-पौधे खूब लगाएं

प्रदूषण को दूर भगाएं 

जंगलो में ना आग लगाएं 

प्रदूषण मुक्त देश बनाएं 

पाना है खान-पान और ऑक्सीजन 

तो मत लेना टेंशन करी अनशन

बस करो जागरूक अभियान जन-जन 

सेवा करो निस्वार्थ भाव से तन-मन-धन

मत बनो नदान, ना खोलो खदान

जिससे ख़त्म होती है विधि-विधान

बन जाएगा ये प्रकृति कूड़ादान

कहीं पहुँच ना जायें हम कब्रिस्तान

क्यूंकि ये है पर्यावरण 

करता है भरण पोषण

लेता भी है जीवन हरण 

इसलिए करना पेड़-पौधों को स्पर्श चरण 

Author

  • रासमनी, झारखंड के पश्चिम सिंहभूम ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। परिवार में सबसे छोटी, रासमनी पी.जी. फर्स्ट सेम्सेटर में क्षेत्रीय भाषा (हो) ऑनर्स की पढ़ाई कर रही हैं। बच्चपन से ही उनको समाज सेवा करने का बहुत मन था, जिसको वह अब काम के ज़रिए और व्यक्तिगत तौर पर कर रही हैं

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