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हसदेव अरण्य में कोयला खनन की कीमत- आदिवासियों और पर्यावरण का विनाश

युवानिया डेस्क:

जिस गति से पर्यावरण में बदलाव आ रहे हैं, वह किसी एक इलाके के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में कोयला खनन के लिए हज़ारों हेक्टेयर में फैले जंगलों में मौजूद लाखों पेड़ों को काटने की स्वीकृति दे दी गयी है। यहाँ बात की जा रही है छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य इलाके की। 2022 में दूसरे चरण की स्वीकृति मिल जाने के बाद खनन के यहाँ के लोगों और पर्यावरण पर तात्कालिक और दूरगामी प्रभाव होंगे, जिनकी क्षति अपूरणीय होगी। आइये देखते हैं यह कुछ विडियो, जो इस मुद्दे को समझाने का प्रयास करते हैं।

वीडियो आभार: CHHATTISGARH TRAVELLER

वीडियो आभार: Bastar Talkies

वीडियो आभार: Humans of Chhattisgarh

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