मोहित लोधियाल:
मेरे लिए स्कूल केवल वह जगह नहीं है जहाँ किताबों के अध्याय पूरे किए जाते हैं और परीक्षाएँ दी जाती हैं। स्कूल वह जगह है जहाँ एक बच्चा पढ़ना-लिखना सीखने के साथ-साथ सवाल करना, समझना, अपनी बात कहना और दूसरों के साथ मिलकर आगे बढ़ना भी सीखता है। मैंने अपनी पढ़ाई अलग-अलग स्कूलों में की है और हर स्कूल ने मुझे शिक्षा को एक अलग नज़र से समझने का अवसर दिया।
कक्षा 1 से 5 तक मैंने देवभूमि पब्लिक स्कूल, सुपी, नैनीताल में पढ़ाई की। यह मेरे गाँव से दूसरे गाँव में था। वहाँ पढ़ाने का तरीका अच्छा था। प्रधानाचार्य और शिक्षक भी अच्छे थे और स्कूल का माहौल भी अच्छा लगता था। उस समय मेरे लिए स्कूल का मतलब था एक ऐसी जगह जहाँ शिक्षक हमें पढ़ाते हैं और हम नई-नई चीजें सीखते हैं।
इसके बाद कक्षा 6 से 8 तक मैंने अपने गाँव के G.U.P.S. लोध गल्ला, रामगढ़ में पढ़ाई की। यह एक सरकारी स्कूल था। स्कूल हमारे गाँव में ही था, लेकिन यहाँ शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या थी। स्कूल में मुख्य रूप से प्रधानाचार्य सर ही थे और गणित तथा विज्ञान जैसे विषयों के लिए नियमित शिक्षक नहीं थे। हमारे गाँव के ही दो पढ़े-लिखे युवाओं ने हमें पढ़ाने में मदद की। उन्होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और हमारी पढ़ाई चलती रही।
इस अनुभव से मैंने समझा कि स्कूल की इमारत और किताबों के साथ-साथ अच्छे और पर्याप्त शिक्षकों का होना भी बहुत ज़रूरी है। शिक्षक केवल विषय नहीं पढ़ाते, वे बच्चों के भीतर सीखने की इच्छा भी पैदा करते हैं।
कक्षा 9 और 10 में मैंने अपने गाँव से लगभग दो किलोमीटर दूर K.S.M. GIC, सुपी, नैनीताल में पढ़ाई की। यह भी एक सरकारी स्कूल था। यह स्कूल काफी बड़ा था और यहाँ पर्याप्त शिक्षक थे। लगभग हर विषय के लिए शिक्षक उपलब्ध थे। पढ़ाई अच्छी होती थी और प्रधानाचार्य तथा बाकी शिक्षक भी अच्छे थे। वहाँ पढ़कर मुझे यह महसूस हुआ कि जब स्कूल में पर्याप्त शिक्षक और ज़रूरी संसाधन मौजूद हों, तो बच्चों के लिए सीखना और आगे बढ़ना आसान हो जाता है।
इसके बाद मैं आगे की पढ़ाई के लिए हल्द्वानी आ गया। यहाँ मैंने एक निजी स्कूल में दाखिला लिया और अब मैं कक्षा 12 में पढ़ रहा हूँ। यहाँ स्कूल में लगभग सभी ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। हर विषय के शिक्षक हैं, पढ़ाई अच्छी होती है, स्कूल बस की सुविधा है और पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल भी है।
जब मैं अपनी पूरी स्कूली यात्रा को पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि हर स्कूल ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है। लेकिन इन अनुभवों ने मेरे मन में एक सवाल भी पैदा किया, क्या अच्छी शिक्षा पाने के लिए हर बच्चे को अपने गाँव से शहर की ओर जाना ज़रूरी होना चाहिए?
मेरे गाँव के सरकारी स्कूल में अगर पर्याप्त शिक्षक होते, तो वहाँ पढ़ने वाले बच्चों को भी सीखने के उतने ही अवसर मिल सकते थे, जितने मुझे आगे दूसरे स्कूलों में मिले। गाँव में रहने वाले बच्चों की क्षमता किसी भी तरह कम नहीं होती। ज़रूरत होती है तो केवल उन्हें सही अवसर और सही मार्गदर्शन देने की।
मेरे हिसाब से अच्छा स्कूल कैसा होना चाहिए?
मेरे लिए अच्छा स्कूल केवल बड़ी इमारत, स्मार्ट क्लास या बहुत सारी सुविधाओं का नाम नहीं है। अच्छा स्कूल वह है जहाँ हर बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने का बराबर अवसर मिले।
सबसे ज़रूरी है कि हर स्कूल में पर्याप्त और अच्छे शिक्षक हों। खासकर गाँवों और दूर-दराज के इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं होनी चाहिए। कोई बच्चा केवल इसलिए गणित या विज्ञान से पीछे न रह जाए क्योंकि उसके स्कूल में उस विषय का शिक्षक उपलब्ध नहीं है।
इसके साथ ही पढ़ाई केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों को सवाल पूछने, अपनी बात रखने, चर्चा करने और किसी विषय को अलग-अलग तरीकों से समझने का अवसर मिलना चाहिए। स्कूल ऐसा स्थान होना चाहिए जहाँ बच्चे बिना डर के सवाल कर सकें।
मेरे हिसाब से बच्चों को केवल यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि “सही उत्तर क्या है?”, बल्कि यह भी सिखाया जाना चाहिए कि “सही सवाल कैसे पूछा जाए?”
स्कूल में बच्चों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। गाँव और शहर, अमीर और गरीब, हर बच्चे को समान सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। किसी बच्चे की शिक्षा उसके परिवार की आर्थिक स्थिति या उसके गाँव में रहने की वजह से कम नहीं होनी चाहिए।
शिक्षा का संबंध केवल नौकरी या परीक्षा से नहीं होना चाहिए। स्कूल हमें अपने समाज, पर्यावरण, अधिकारों और ज़िम्मेदारियों को समझने में मदद करता है। हमें यह भी सीखना चाहिए कि हम अपने आसपास की दुनिया को कैसे बेहतर बना सकते हैं।
आज जब मैं कक्षा 12 में हूँ और अपनी स्कूली यात्रा को देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि शिक्षा ने मुझे केवल किताबों का ज्ञान नहीं दिया, बल्कि अपने आसपास की चीजों को समझने की नज़र भी दी है।
मेरी इच्छा है कि आने वाले समय में किसी बच्चे को यह न कहना पड़े कि “हमारे स्कूल में शिक्षक नहीं था, इसलिए हम यह नहीं सीख पाए।” हर बच्चे को ऐसा स्कूल मिले जहाँ उसे सीखने का अवसर मिले, सवाल पूछने की आज़ादी मिले और अपने सपनों को आगे बढ़ाने का हौसला मिले।
मेरी नज़र में शिक्षा का असली उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि एक ऐसा इंसान बनना है जो सोच सके, सवाल कर सके, सही और गलत को समझ सके और अपने समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सके।
और मेरे लिए एक अच्छा स्कूल वही है जो बच्चे को केवल अगली कक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करे।

