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जन जागरण शक्ति संगठन: युवाओं के साथ सामाजिक परिवर्तन की ओर एक कदम

ब्रजेश कुमार निराला:

किसी भी देश या समाज का विकास तभी संभव है, जब वहाँ के लोग, खासकर युवा, एक साथ मिलकर सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनें। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जन जागरण शक्ति संगठन ने युवाओं के लिए विशेष एक महीने के अभियान का संकल्प लिया। यह एक महीना सिर्फ समय बिताना नहीं था, बल्कि युवाओं के भविष्य को एक नई दिशा देने का सुनहरा अवसर है।

इस एक महीने के दौरान जन जागरण शक्ति संगठन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में एकता की जागरूकता फैलाना, सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना, और ऊँच-नीच, भेदभाव, छुआछूत को मिटाना, तथा समाज के प्रति घृणा को मिटाकर एकजुट बनाना हमारा संकल्प है।

खासकर लड़कियों के लिए, जो घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं और अपनी आवाज़ नहीं उठा पाती हैं, लेकिन जेजेएसएस  के माध्यम से लड़कियों को बोलने और अपनी बात-विमर्श करने का मौका दिया जाता है।

जन जागरण शक्ति संगठन में कुछ बेसिक चीजें भी सिखाई जाती हैं, जैसे यूनिवर्स की उत्पत्ति और मानव, जीव-जंतु की उत्पत्ति कैसे हुई, ये सब बताया जाता है, जिससे हमारी सोच में बहुत परिवर्तन होता है।

हम लोग पहले क्या सोचते थे? पहले सोचते थे कि मानव और पृथ्वी को भगवान ने बनाया है, और हमारे साथ जितने भी पेड़-पौधे, जीव-जंतु, पानी और पहाड़ हैं, सभी की रचना ब्रह्मा ने की है। और हमारे साथ जितनी भी घटनाएँ घटती हैं, वो सब कर्म के आधार पर घटती हैं। और हमसे नीचे जात वाले या धर्म वाले से घृणा करना, ये सब होता था।

लेकिन JJSS इंटर्नशिप करने के बाद ये सब के बारे में जाना और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए एक-दूसरे से भाईचारा बनाया। गाँव जाकर अलग-अलग धर्म, जाति के लोगों के साथ खेल करवाया, उनके घर खाना खाया, और साबित किया कि जितने भी अंधविश्वास हैं, सब झूठे हैं। सभी के साथ भाईचारा बनाया, एकजुट हुए।

जन जागरण शक्ति संगठन से हमें नेपाल जैसे देश का भी भ्रमण करने का मौका मिला। नेपाल जाने का मुख्य कारण वहाँ के रीति-रिवाजों को जानना, यह समझना कि वहाँ भेदभाव होता है या नहीं, महिलाओं का क्या योगदान है, और उनके साथ अत्याचार होता है या नहीं, जैसा कि हमारे देश भारत, खासकर बिहार में देखने को मिलता है। हमें नेपाल जाकर बहुत अच्छा लगा, क्योंकि वहाँ पर भेदभाव, छुआछूत, महिलाओं पर अत्याचार, ये सब कुछ नहीं था। वहाँ की महिलाओं के पास अपना फैसला खुद करने का अधिकार है, और वहाँ का मौसम भी बहुत अच्छा लगा। हम कभी नेपाल नहीं गए थे, तो हमें थोड़ी-बहुत परेशानियों का सामना भी करना पड़ा, जैसे नोट चलाने में, कोई सामान खरीदने में भी, लेकिन बहुत मज़ा आया।

जन जागरण शक्ति संगठन के 2026 बैच में लगभग 33 इंटर्न्स थे, जिसमें 9वीं कक्षा के 12 इंटर्न्स थे और 12वीं पास सहित 15 से 22 वर्ष के बच्चे थे। सभी अलग-अलग जिले से थे। यह शिविर बिहार के अररिया में आयोजित की गई थी। 

इसलिए मैं जन जागरण शक्ति संगठन का धन्यवाद करना चाहूँगा, मुझे लायक बनाने के लिए।

हमारा नारा है-

1. शिक्षित हो, संगठित हो।
संघर्ष करो, संघर्ष करो।

2. स्वच्छ भारत, सुंदर भारत।

3. हर धर्म के भ्रम को तोड़ेंगे,
इतिहास की धारा मोड़ेंगे…

Author

  • ब्रजेश, बिहार के गया ज़िले से हैं। वह स्थानीय संगठन मजदूर किसान समिति के साथ स्थानीय मुद्दों पर काम करते हैं। ब्रजेश, सामाजिक परिवर्तन शाल से भी जुड़े हैं। वह गाँव के बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाते हैं।

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