उदयलाल भील:
मैं उदयलाल भील, गाँव- रोड़जी का खेड़ा, तहसील- डुगला, जिला चित्तौड़गढ़ से हूँ, मैं खेमराज बासा के साथ 1996 में जुड़ा। मैंने उनके साथ रहकर रहकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी, एसटी) समुदायों के लोगों को ज़मीन दिलवाना, उनके साथ होने वाली मारपीट, और छुआछूत जैसे कई मुद्दों पर काम किया। खेमराज बासा ने कई मुद्दे उठाये जिनमें हम सफल भी हुए, जैसे-
1. खाट आंदोलन समेलिया गाँव में
2. कियारखेड़ा मंदिर प्रवेश
3. पैमाखेड़ा कनेरा में बलात्कार केस
4. अचलपुरा खाट आंदोलन
5. नन्दलाल भील का खेत 20 वर्ष पूर्व का कब्ज़ा सोनी से छुड़वाया
समेलिया गाँव में गवरी नृत्य होने पर गाँव के राजपूत, ब्राह्मण, भील, मेघवाल, नायक, आदि सभी जाति के लोग नृत्य देख रहे थे। तभी एक राजपूत ने कहा, “भील और मेघवाल लोग! तुम सब खाट पर क्यों बैठे हो?” तो हमारे भील जाति के गोपी लाल जी भील जो अध्यापक थे, उन्होंने कहाँ कि सभी समान हैं, आप हमें खाट पर बैठने से मना नहीं कर सकते हैं। इसी बात को लेकर हमारा झगड़ा हो गया था। इसके बाद, 15 दिन बाद हमने गाँव-गाँव में जाकर बैठकें करना शुरू कर दिया। समेलिया महादेव से पैदल चलकर ठाकुर सा के घर के बाहर 20-25 खाट लाकर वहाँ पर हमने करीब 1,000 से 1,500 लोगों को खाट पर बिठाया, जिनमें भील, मीणा, मेघवाल लोग थे, इस तरह हमारी जीत हुई और लोगों में एकता की मिसाल बनी।
कियारखेड़ा गाँव में जाट, गुर्जर व राजपूत समाज द्वारा गाँव में भगवान के मंदिर में गाँव के भील और चमार समुदाय के लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। हमारे संगठन ने गाँव-गाँव में बैठक करके एससी और एसटी समुदाय के करीब 2 से 3 हज़ार लोगों को एक-एक करके पुलिस के साथ ढोल, नगाढ़ा व बाजों के साथ मंदिर में प्रवेश करवाया था।
पैमाखेड़ा में एक ठाकुर व्यक्ति ने चमार जाति की एक महिला के साथ बलात्कार किया। इसकी उलाहना देने के लिए लड़की के काकाजी उस ठाकुर के घर गए। दूसरे दिन ठाकुर ने काका के घर जाकर उसकी हत्या कर दी। जब स्थानीय एससी और एसटी समुदाय के लोगों ने खेमराज जी से बात की तो गाँव-गाँव में बैठकें आयोजित की गई और लोगों को कनेरा बस स्टॉप पर इकठ्ठा किया। बड़ी भारी भीड़ के साथ में लोगों ने जुलुस निकाला। इसका यह असर हुआ कि खुद एसपी और कलैक्टर साहब आकर उस ठाकुर व्यक्ति को पकड़ कर ले गए।
विजयपुर में नन्दलाल भील की ज़मीन पर 20 वर्षों से सोनी समाज के एक आदमी का गैरकानूनी कब्ज़ा था। उस ज़मीन को संगठन की मदद से नन्दलाल को वापिस दिलवाया गया और उस व्यक्ति के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की गई।

