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अंशू और रोहित के अंतरजातीय प्रेम की कहानी

अभिलाषा श्रीवास्तव और असीम हसनैन:

“मेरे कॉलेज की लड़कियाँ बहुत साहसी थी। वे कुछ न कुछ नया करती रहती थी। तो मैंने खुद से कहा कि मैं भी कुछ अलग करूंगी।” और निश्चित ही अंशु ने यह किया भी।

मध्य प्रदेश के एक रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार की एक युवा महानगरीय महिला है अंशू, जो अपने पिता की सेना (आर्मी) की नौकरी के चलते बार-बार बदली होने की वजह से भारत के विभिन्न हिस्सों में पली-बढ़ी है। उसके पिता की जब दिल्ली में पोस्टिंग आई तो अंशु वहीं सेना में ही नौकरी करने वाले रोहित के पिता और उसके परिवार से मिली। दोनों परिवार एक ही जगह पर रहते थे। रोहित का परिवार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रूढ़िवादी जाट समुदाय से है। अंशू आस-पड़ोस के बच्चों को पढ़ाती थी, जिसमें रोहित के छोटे भाई-बहन भी शामिल थे और रोहित भी अंशू और उसके परिवार से परिचित था। रोहित को भी सेना में नौकरी मिलने पर वह पोस्टिंग पर चला गया। दिल्ली छोड़ने से पहले रोहित और अंशु कई महीनों तक मिलते-जुलते रहे। लंबी दूरी के कारण उन्हें अपने रिश्ते को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा और इसलिए भी क्योंकि मोबाइल या टेलीफोन की उपलब्धता मुश्किल थी। रोहित सेना में एक प्रशिक्षु के रूप में भर्ती हुआ था और उसके पास टेलीफोन इस्तेमाल करने के बहुत सीमित मौके होते थे। अंशू की भी फोन तक पहुँच, उसके माता-पिता और बड़े भाई द्वारा भारी रूप से नियंत्रित थी।

इसी दौरान, अंशू और रोहित दोनों ने अपने माता-पिता को अपने रिश्ते और शादी करने के इरादे के बारे में बताया। रोहित के माता-पिता ने उनका विरोध नहीं किया, वह केवल इस बात से आशंकित थे कि लड़की का परिवार इस तरह के प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देगा। वहीं, अंशू के परिवार में इसका भारी विरोध हुआ। उसके माता-पिता ने अपने बच्चों की परवरिश इस विश्वास के साथ की थी कि वे उच्चतम प्रकार के ब्राह्मण समुदाय से हैं, जो केवल समान हैसियत वाले ब्राह्मणों के बीच ही शादी कर सकते हैं। स्पष्ट रूप से उनके लिए किसी भी अन्य विकल्प का सवाल ही नहीं उठता था। यह पता चलने पर, अंशू के माता-पिता ने उसे भावनात्मक और शारीरिक रूप से परेशान किया और उसे घर के अंदर बंद कर दिया। उसे उसके दोस्तों से मिलने और कॉलेज जाने से रोक दिया गया, साथ ही उन्होने रोहित के पिता को कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। माता-पिता के गंभीर उत्पीड़न और दबाव ने अंशू को अपने माता-पिता से यह वादा करने के लिए मजबूर किया कि वह 2015 में अपने रिश्ते को खत्म कर देगी। हालांकि, अंशु और रोहित अगले दो सालों तक गुप्त रूप से संपर्क में बने रहे। इस दौरान दोनों के माता-पिता, बच्चों के रिश्ते को खत्म मानकर अपनी पसंद के अन्य लोगों के साथ उनकी शादी की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे थे।

इस बीच, अंशू ने उन संसाधनों/संपर्कों का पता लगाने का प्रयास किया जो इस स्थिति में उसकी और रोहित की मदद कर सकते थे और वह धनक के संपर्क में आई। धनक टीम के सदस्यों के साथ उनका लगातार पत्राचार और टेलीफोन पर बातचीत उनकी शक्ति का स्रोत थी। जैसा वह चाहती थी, वह करने का उनका संकल्प, इसका एक बड़ा कारण भी था। धनक ने अंशू को यह समझने में मदद की कि वह जो कर रही है, वह सही है। एक बार जब अंशू और रोहित ने अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ स्वतंत्र रूप से शादी करने का फैसला किया, तो धनक ने उन्हें एक वकील से मिलवाया और बिना किसी परेशानी के उनकी शादी हो पाए, इसमें उनका सहयोग किया।

जब उन्होंने अपने माता-पिता को अपनी शादी के बारे में सूचित किया, तो दोनों के ही माता-पिता ने नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। माता-पिता की शत्रुता के कारण नवविवाहित जोड़े के पास जाने के लिए कोई जगह नहीं थी। और इसलिए रोहित के माता-पिता के आने तक और शादी स्वीकार करने से पहले तक, वे दोनों कई हफ्तों तक धनक के एक ‘सुरक्षित घर’ में रहे। रोहित के माता-पिता धनक में उनसे मिलने गए और अंततः उन्हें अपने साथ पास के शहर में उनके साथ रहने के लिए कहा, जहाँ वे रहते थे। वहीं, अंशू के माता-पिता ने इस शादी को स्वीकार नहीं किया, वह इस जोड़े से अलग-थलग रहे, और उनसे कोई संपर्क बनाने के प्रयास नहीं किए। इस बीच, रोहित के माता-पिता ने जोड़े के लिए एक शादी का रिसेप्शन आयोजित करने का फैसला किया ताकि उन्हें अपने सामाजिक दायरे में पति और पत्नी के रूप में पेश किया जा सके।

अंशू के परिवार में, उसके पिता मुख्य व्यक्ति थे, क्योंकि उनकी राय ही बाकी सभी के व्यवहार और निर्णयों पर प्रभाव डालती थी। उसकी माँ, वैसे तो एक एक स्नेही माता है, जो इस विवाह के बारे में शायद आश्वस्त हो सकती थी। लेकिन उन्होने भी इस मामले पर अपने पति के निर्णय के आधार पर बच्चों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसी तरह, अंशु के भाई-बहन भी उसकी दुर्दशा से चिंतित थे, लेकिन उन्होंने भी मदद करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें इस मामले में अपने पिता की जिद का अंदेशा था। उसके रिश्तेदारों में कोई भी नहीं था, एक भी व्यक्ति नहीं, जो उसके फैसले का समर्थन करने आया हो। अंशू के पिता ने दो मुख्य आधारों पर इस जोड़ी का विरोध किया, पहला दोनों परिवारों की जाति पहचान के बीच कथित अंतर था। जाट समुदाय को आम तौर पर ‘शूद्र वर्ण’ में शामिल किया जाता है और संवैधानिक रूप से इसे ‘अन्य पिछड़ी जातियों’ में शामिल किया जाता है, जबकि ब्राह्मणों को भारतीय समाज में सर्वोच्च सामाजिक दर्जा प्राप्त है। यह विवाह उन्हें उनके रूढ़िवादी सामाजिक दायरे में बदनामी दिलाएगा।

दूसरा कारण था अंशू के पिता की उसके विद्रोह के प्रति असहिष्णुता। वह यह स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि उनकी बेटी, जो वैसे तो बहुत आज्ञाकारी थी और जीवन के सभी बड़े फैसलों के लिए उन पर निर्भर थी, अपने आप इतना महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती थी। अंशू की आज़ादी ने उसके पिता के अहंकार को चोट पहुँचाई, एक पुरुष, माता-पिता की जोड़ी में और परिवार में शक्ति का केंद्र है। अंशु के पिता और भाई ने विशेष रूप से अंशु के फैसले के लिए उसे शर्मिंदा करने की कोशिश की और उसके पास मौजूद सभी ‘विशेषाधिकारों’ के साथ-साथ उसके पालन-पोषण और शिक्षा पर खर्च हुए पैसे की बात करते हुए भी उसे खरी-खोटी सुनाई।

अंशू और रोहित समझते हैं कि उनकी शादी कठिन थी लेकिन अंतरधार्मिक विवाह की तुलना में यह फिर भी आसान थी। धनक की सक्रिय मदद से वे हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शादी करने और अपनी शादी को पंजीकृत कराने में सक्षम हुए। रोहित के दोस्त सेना की ड्यूटी पर होने कारण अनुपलब्ध थे और दिल्ली में अंशू के दोस्तों ने उसकी शादी और पंजीकरण के दौरान उसका समर्थन करने या गवाह बनने से साफ इनकार कर दिया था।

रोहित, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक रूढ़िवादी ग्रामीण जाट परिवार से आते हैं, जो सजातीय विवाह का ही पक्षधर था। हालाँकि रोहित का इरादा शादी को लेकर सामाजिक मानदंडों को तोड़ने का नहीं था, लेकिन वह स्पष्ट था कि वह अपने रिश्ते में जाति या धर्म को आड़े आने नहीं देगा। लड़की उसके अपने समुदाय के बाहर की थी तो उसने कड़ी मेहनत की और अपने परिवार को मना ही लिया। हालाँकि रोहित का परिवार इस जोड़ी को लेकर उत्साहित नहीं था, लेकिन उनका विरोध अंशु के माता-पिता के जितना नहीं था। रोहित के माता-पिता की मुख्य चिंता अंशू के माता-पिता की प्रतिक्रिया के बारे में थी और इस बात से थी कि कहीं वे अंतरजातीय विवाह के कारण रोहित को नुकसान तो नहीं पहुँचाएँगे। हालाँकि, रोहित के माता-पिता ने उसकी शादी के खिलाफ अलग तरह से या शायद कहीं अधिक दृढ़ता से विरोध व्यक्त किया होता अगर वह, उनकी जाति से निचली मानी जाने वाली किसी जाति या मुस्लिम समुदाय की लड़की होती। यह तथ्य कि उनकी बहू ‘तथाकथित उच्च जाति’ से आती है ने रोहित के माता-पिता को उसकी शादी को अधिक आसानी से स्वीकार करने में मदद की। वह जानते थे कि इस शादी के कारण उन्हें अपने सामाजिक दायरे में किसी भी तरह की बदनामी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्रेम विवाह करने का अंशू का फैसला भले ही अपनी जाति से बाहर हो, लेकिन यह कोई सामान्य बात नहीं है। एक रूढ़िवादी, पितृसत्तात्मक, उच्च जाति के घर में अंशु की परवरिश ने उसे इस तरह से आकार दिया होगा कि उसे अपने परिवार के संकीर्ण दृष्टिकोण को पुन: पेश करना चाहिए था। हालाँकि, उनके पिता की स्थानांतरणीय नौकरी ने उन्हें भारत भर के विभिन्न इलाकों में बड़े होने का अवसर दिया, जहाँ जाति भेद-भाव, बंटवारा इतना व्यापक/मुखर रूप से दिखता नहीं था। दिल्ली के एक प्रगतिशील गर्ल्स कॉलेज में अंशु की शिक्षा ने उसे सामाजिक मानदंडों को अपनाने, उन पर सवाल उठाने और अंततः उन्हें तोड़ने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंशू ने खुद से कहा कि वह अपने जीवन में केवल सामाजिक मानदंडों के अनुरूप काम नहीं करेगी। विशेष रूप से, उनके कॉलेज के अनुभव ने जाति और सगोत्र विवाह के मानदंडों से उनके क्रमिक अलगाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, धनक टीम के साथ उनकी बातचीत से उन्हें पूरी तरह से विश्वास हो गया कि वह जो कर रही हैं वह आधुनिक, प्रगतिशील समाज के लिए बिलकुल सही और वांछनीय है।

(यह रिपोर्ट एक वास्तविक अनुभव पर आधारित है , निजता और गोपनीयता बनाए रखने के लिए पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं।)

Author

  • धनक ऑफ ह्यूमैनिटी एक गैर-लाभकारी संस्था है जिसमें अंतरधार्मिक जोड़े, अंतरजातीय जोड़े और धनक के हित में विश्वास करने वाले व्यक्ति शामिल हैं। कुछ अंतरधार्मिक जोड़ों ने 2004 में एक सहायता समूह के रूप में धनक की स्थापना की। इसे 2012 में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया था। धनक भारत का एकमात्र संगठन है जो अंतरधार्मिक और अंतरजातीय जोड़ों, LGBTQIA जोड़ों और अपनी स्वायत्तता का दावा करने वाले व्यक्तियों के सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों पर काम कर रहा है। धनक ने 5000 से अधिक व्यक्तियों के जीवन को प्रभावित किया है।

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