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बच्चों की पिटाई के बारे में कुछ ये कह रही हैं फ़ैज़ाबाद की महिलाएं

हमको लगता है कि अगर बच्चे कोई गलती करते हैं तो उनको बलभर मारना चाहिए। “बच्चे सीने पे चढ़के खाएं, पर खोपड़ी पे सवार न होए।” जो मांगेंगे सब मिलेगा पर ज़िद अगर दिखाएंगे मार तो पड़ेगी। एक बार मेरी लड़की का हाथ साइकिल में फंस गया था और उसके हाथ में आठ टाका लगा। पहले तो हमको देखके रोना आया फिर अस्पताल से दवा-पट्टी करा के घर लाये, दूसरे दिन वो अपने आप पट्टी खोल ली और जो टाका लगा था उस धागे को नोचने लगी। हमे गुस्सा आया बहुत तेज़, कि बताओ अभी चोट सही भी नहींं हुआ है और उंगल पेंच शुरू कर दिये हैं। तब बताओ इनको मारे न तो क्या करें? 

तरन्नुम बानो; दिलकुशा धारा रोड

मेरे हिसाब से अगर बच्चे गलती करते हैं, तो उनको मारना चाहिए, नहीं तो ये लोग ढीठ बन जायेंगे। कोई बात भी नहीं मानेंगे। भईया अगर बच्चों का भविष्य बनाना हो तो थोड़ा डरा-धमका कर रखना चाहिए। वैसे भी घर में एक लोग से तो बच्चे को डरना चाहिए, नहींं तो सिर चढ़ जायेंगे। मेरा लड़का एक बार पता नहीं कहाँ से गाली सीख के आया था। बात ही बात में अपनी बच्चों को वो गाली दिया। फिर तो हम इनको इतना मारे हैं कि उसके बाद से उनके मुँह से गाली नहीं निकली। अगर उस वक़्त हम न मारते और उसकी बातों को अनदेखा कर देते तो वो और शेर हो जाता। 

सुषमा; दिलकुशा धारा रोड

बच्चों को मारना नहींं चाहिए, लेकिन मैं अक्सर अपने बच्चों को मार देती हूँ। क्योंकि जब मेरी सब्र की इंतेहा पार हो जाती है और ये लोग बात एक दम नहींं मानते तो गुस्से में हाथ उठ जाता है। एक तो कोरोना काल में बच्चों को मोबाइल दिया था पढ़ने को पर अब ये लोग हर समय मोबाइल चलाते रहते हैं। रिश्तेदारों के बच्चों से जब मेरे बच्चे झगड़ा करते हैं तो ऐसे में हम दूसरे के बच्चों को कुछ कह नहींं सकते, तो अपने ही बच्चे को पीट देते हैं ताकि अगली बार उनके साथ न खेलें। वो अक्सर मुझे इस बात पर ज्यादा गुस्सा आता है कि जब बच्चों को एक ही बात बार-बार बताने पर भी समझ न आये तो मन करता है कि खूब मारें, क्योंकि हम तंग आ जाते हैं।

सिम्मी; घोसियाना फैज़ाबाद

बच्चों को मारना तो नहींं चाहिए, लेकिन जब बहुत ज्यादा परेशान करे या बद्तमीज़ी करे तो उनको मारना चाहिए, क्योंकि उनको अपनी हद पता होनी चाहिए। बच्चों को खयाल होना चाहिए कि माँ बाप की इज़्ज़त करनी है और उनसे तमीज़ से पेश आना चाहिए। हमने तो अपने बच्चों तब ही मारा है जब वो मेरी बात एक दम नहींं माने हैं और बद्तमीज़ी से बात किये हैं। इस बात के लिए हमने अपने बच्चों को बहुत मारा है, पर बाद में हमको बहुत दुःख भी हुआ है पर बच्चों को अच्छा बनाने के लिए कुछ तो करना होगा।

ज़ाहेदुन निशा; दिलकुशा धारा रोड

हाँ बिल्कुल मारना चाहिए जब गलती करें तो, ये नहींं कि उनकी गलती को बढ़ावा देने के लिए छोड़ दें। नहींं तो बात नहीं मानेंगे और अपनी मनमानी करेंगे। हम तो अपने बच्चे को मारते हैं, क्योंकि भइया ये लोग पढ़ाई नहीं करते हैं। दिन भर खेलते रहते हैं। मेरा कहना है कि खेलो पर समय से पढ़ाई भी करो। अगर ये लोग पढ़ेंगे नहीं तो क्या करेंगे? ऊपर से फोन ने इन लोगो को बर्बाद कर दिया है। पूरा दिन फोन चलाते रहते हैं, मार के अगर फोन न छीनो तो ये लोग दिन भर फोन में लगे रहेंगे। बच्चों की गलती होने पर मारना तो पड़ेगा ही, क्योंकि बातों से ये लोग मानते ही नहीं है, तो डराने के लिए मारना पड़ता है। 

सुनीता राणा; दिलकुशा धारा रोड

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