सुनील कुमार:
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित है गोकुलपुर आदिवासी बस्ती। इस बस्ती में लगभग 25 घर सहरिया (आदिवासी) समाज के हैं। यह बस्ती लगभग 80 वर्ष पुरानी है, लेकिन आज भी यहाँ के लोग मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। यहाँ के लोगों की आजीविका का एक मात्र साधन मज़दूरी ही है, जिसके लिए उन्हें शहर से बाहर भी जाना होता है। इसी बस्ती में एक रामलखन आदिवासी नाम का युवा भी रहता है। वह ही बस एक मात्र लड़का है जिसने चुनौतियों का सामना करके अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और अपने संवैधानिक अधिकारों को समझा और समाज के विकास के लिए कार्य करने की पहल की।
बस्ती के दो सबसे बड़े मुद्दे हैं। पहला लोगों के पास अपना कोई डॉक्यूमेंट नहीं होना और दूसरा, अन्य समाज के लोगों द्वारा सहरियाओं के पुश्तेनी चबूतरे और शमशान घाट को तोड़कर उस पर प्लॉटिंग का काम किया जा रहा था। बस्ती के लोगों में इतनी हिम्मत नहीं हो पा रही थी कि कोई कार्रवाही करने के लिए आगे बढ़ पाएँ। फिर रामलखन ने बस्ती में लोगों के साथ बैठकें की और उन्हें साथ में मिलकर कार्रवाही करने के लिए प्रेरित किया। इन बैठकों से यह परिणाम निकल कर आया कि लोग इसके लिए कहीं भी जाने के लिए तैयार हुए।
13 फरवरी 2024 को सभी संगठित होकर ग्वालियर कलेक्टर ऑफिस गए और कलेक्टर को आवेदन दिया। इसमें यह अनुरोध किया गया कि दबंगों से हमारी पुश्तैनी ज़मीनों को वापस दिलवाया जाये और हमारे डॉक्यूमेंट जैसे – जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, मज़दूरी कार्ड बनवाने और अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए बस्ती में कैंप लगाया जाये। यह आवेदन एस.डी.एम. को दिया गया। फिर उसके बाद एस.पी. ऑफिस जाकर भी दबंगों पर कार्रवाही करने के लिए आवेदन दिया गया। बस्ती के लोग आवेदन देकर वापस बस्ती पहुँचे भी नहीं थे कि अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाही करना चालू किया। सरकारी अफसरों की एक टीम मुआयना करने के लिए तुरंत बस्ती में गयी, लोगों से बात की और जल्दी ही बस्ती में सरकारी कैंप लगवाने की बात कही। अगले दिन पुलिस थाने से भी एक टीम बस्ती में निरिक्षण करने आई और दबंग लोगों को समझाइश दी कि वह अवैध कब्ज़ा ना करें, नहीं तो उन पर कानूनी कार्रवाही की जाएगी।
22 फरवरी को सरकारी टीम जिसमें एस.डी.एम, तहसीलदार, पटवारी, आंगनवाड़ी की टीम और नगर निगम की टीम ने भाग लिया और उनकी पात्रता और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए आवेदन भरे। इसके बाद अगले 10 दिन के अन्दर ही 25 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाकर उन्हें दे दिए गए और अन्य डॉक्यूमेंट भी बन कर बस्ती के लोगों को मिल जायेंगे।
इस पूरे संघर्ष के बाद लोगों के अन्दर आत्मविश्वास पैदा हुआ कि जब समाज संगठित होता है तो वह अपने अधिकारों की लड़ाई आसानी से लड़ सकता है। अब रामलखन ने संकल्प लिया है कि वह अपने समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य करेगा और युवाओं को संगठित करके एक मंच तैयार करेगा जहाँ से समाज के विकास की बड़ी लड़ाई लड़ी जाएगी।

