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सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा मानवाधिकारों की पैरवी करने वालों लिए एक ज़रूरी पाठ है ‘संघर्ष नर्मदा का’

युवानिया डेस्क: 

नंदिनी ओझा द्वारा लिखित किताब ‘संघर्ष नर्मदा का’, नर्मदा बचाओ आंदोलन में नर्मदा घाटी के लोगों, ख़ासकर आदिवासी समुदाय के योगदान, संघर्ष और बलिदानों की कहानी को उनके ही नज़रिये से सामने लाती है। सरदार सरोवर बाँध से प्रभावित आदिवासियों के जीवन, विस्थापन और पुनर्स्थापन की पीड़ाजनक प्रक्रिया के ब्योरे इस किताब में दर्ज हैं जो प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली और विनाशकारी विकास-प्रक्रिया के द्वन्द्व के हवाले से, मानव समाज की भावी चुनौतियों और समाधान की ओर संकेत करते हैं। वाचिक इतिहास की अहमियत को रेखांकित करती हुई यह किताब बतलाती है कि स्मृति को सुनना एक राजनीतिक कर्म भी हो सकता है और परिवर्तनकारी भी। कार्यकर्ताओं, पयार्वरण-अध्येताओं, नेतृत्व में रुचि रखनेवालों तथा मानवाधिकारों की पैरवी करने वाले लोगों के लिए यह किताब एक ज़रूरी पाठ है।

पुस्तक परिचय और फोटो आभार: राजकमल प्रकाशन

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