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पश्चिम सिंहभूम, झारखंड से लॉकडाउन में गाँव की कहानी, साथी की ज़ुबानी

रासमनी तांती:

लॉकडाउन और राहत कार्य:
कोविड-19 महामारी के कारण भारत के प्रधानमंत्री ने 23 मार्च 2020 से संपूर्ण देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया। दूसरा लॉकडाउन 15 अप्रैल से 3 मई तक और तीसरा लॉकडाउन 4 मई से 31 मई तक रहने के बाद, स्थिति संभालने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंप दी गई। लॉकडाउन के दौरान, झारखंड सरकार के आदेश अनुसार दीदी किचन –एम.एम.डी. के माध्यम से, गुलकेड़ा पंचायत में, आजीविका मां दुर्गा सखी मंडल की दीदी श्रीमती सुजीता तांती के साथ मिलकर हमने लगातार 22 दिनों में कुल 2358 ज़रूरतमंद लोगों को खाना खिलाया।

जरूरतमंद परिवारों को खाना खिलाया

इसके अलावा छात्र युवा संघर्ष वाहिनी (जिससे मैं भी जुड़ी हूँ), द्वारा विभिन्न स्रोतों से सहयोग राशि इकट्ठा करके कोल्हान प्रमंडल में लगभग 1000 ज़रूरतमंद परिवारों (विकलांगों, विधवाओं, एकल महिलाओं, निराश्रित वृद्धों, घुमंतू, गरीब और राहगीरों) को राहत सामग्री का वितरण किया गया। साथ ही लगभग 300 ज़रूरतमंद लोगों और राहगीरों को खिचड़ी भी खिलाई गई।

लॉकडाउन, सोशल ऑडिट और रोजगार:
महामारी के दौरान झारखंड सरकार के आदेशानुसार मनरेगा में सोशल ऑडिट (समवर्ती सामाजिक अंकेक्षण) का कार्य प्रारंभ हुआ। पंचायत भवन में क्वारेंटाइन सेंटर होने के कारण ऑडिट टीम (जिसका मैं भी हिस्सा हूँ) के हर सदस्य को प्रतिदिन घर से कार्यस्थल तक आना-जाना करना पड़ा। महामारी के दौरान कुछ इस तरह से सोशल ऑडिट का कार्य पूरा किया गया, जिसमें कोविड-19 को बढ़ने से रोकने के लिए बनाए गए सभी नियमों का पालन किया गया।

सोशल ऑडिट के चलते मनरेगा स्कीम का निरिक्षण करते हुए

मेरे ज़िले पश्चिम सिंहभूम में अब तक 110 पंचायतों में सोशल ऑडिट संपन्न हो चुकी है, जिसमें मनरेगा से जुड़ी 3092 स्कीम को देखा गया, इस दौरान 2023 मज़दूरों से संपर्क किया और उन्हें काम करने के लिए प्रेरित किया गया। जिन मज़दूरों को मज़दूरी या अन्य भुगतान की समस्याएं थी उनसे भी हम लोगों ने संपर्क किया। ऐसे (1881) मज़दूरों की समस्या के समाधान के लिए प्रखंड में भेजा गया, जहां लगभग 1 लाख 68 हज़ार 76 रु. के भुगतान का ज़िम्मा प्रखंड को दिया गया।

मज़दूरों के साथ जॉब कार्ड और काम का आवेदन भरते हुए

इसके अलावा मैंने और अन्य साथियों ने मिलकर 1804 मज़दूरों का नए जॉब कार्ड का आवेदन करवाया। इस दरमियान मज़दूर मंच का एक अभियान चला जिसके तहत मैंने चक्रधरपुर प्रखंड की 6 पंचायतों में 250 मज़दूरों के लिए काम की मांग की। इसके अलावा हमारे क्षेत्र में ‘काम मांगो, काम पाओ’ अभियान का काम भी चल रहा है, इसके तहत मैंने चक्रधरपुर प्रखंड की 4 पंचायतों में अब तक कुल 295 मज़दूरों के लिए काम की मांग की है। मैं और मेरे सभी साथी आगे भी यह काम करते रहेंगे। 

Author

  • रासमनी, झारखंड के पश्चिम सिंहभूम ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। परिवार में सबसे छोटी, रासमनी पी.जी. फर्स्ट सेम्सेटर में क्षेत्रीय भाषा (हो) ऑनर्स की पढ़ाई कर रही हैं। बच्चपन से ही उनको समाज सेवा करने का बहुत मन था, जिसको वह अब काम के ज़रिए और व्यक्तिगत तौर पर कर रही हैं

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