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टूटी सड़कें, अधूरी सुविधाएँ: मेरे गाँव की परेशानियाँ

रत्नावती नाग:

मेरे गाँव के सरपंचों ने बाहर-बाहर सड़क बनवाई है, लेकिन पारा या मोहल्लों के अंदर सड़क नहीं है, जिसके कारण लोगों को बहुत सारी परेशानियाँ झेलनी पड़ती हैं। बरसात के समय लोगों को और ज़्यादा परेशानी होती है। रास्तों पर कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं, और कई लोग गिर भी जाते हैं। बच्चों को भी स्कूल जाने में परेशानी होती है क्योंकि बाढ़ आने पर आना-जाना बंद हो जाता है, जिसके कारण उनकी क्लास छूट जाती हैं और वे पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं।

अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए, तो उसे अस्पताल ले जाना बहुत मुश्किल हो जाता है। बरसात के समय अगर किसी घर में गर्भवती महिला हो, तो उस परिवार को सबसे ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। डिलिवरी का समय आने पर उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए पहले पैदल या बाइक से धीरे-धीरे किसी अच्छे रास्ते तक पहुँचाया जाता है। उसके बाद ही एम्बुलेंस की सुविधा मिल पाती है। तब तक एक गर्भवती महिला को कितना दर्द सहना पड़ता होगा। 

मेरे गाँव में कुछ सामान या ज़रूरत की चीज़ें खरीदने के लिए भी गाँव से बाहर जाना पड़ता है।

रास्ता ठीक न होने के कारण लोगों को कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन फिर भी उन्हें अपना पेट पालने और परिवार चलाने के लिए इन परिस्थितियों से जूझते हुए अपनी ज़िंदगी गुज़ारनी पड़ती है। फिर भी सरपंच को इसकी कोई चिंता नहीं है।

गाँव में सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है।

Author

  • रत्नावती नाग छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले की निवासी हैं और वर्तमान में राज्य स्तरीय सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हुई हैं। उन्हें ग्रामीण जीवन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समुदायों से जुड़े अनुभवों तथा विचारों को लेखन के माध्यम से अभिव्यक्त करना पसंद है।

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