सिम्मी एवं रबाब:
अवध पीपुल्स फोरम द्वारा आयोजित तीसरा गर्ल्स कन्वेंशन 10 जनवरी 2026 को अयोध्या के एम.पी. हॉल, जे.बी.ए. में संपन्न हुआ। यह कन्वेंशन केवल एक दिन का आयोजन नहीं था, बल्कि उन निरंतर प्रयासों का उत्सव था, जो प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र के माध्यम से पिछले कई वर्षों से किशोरियों के साथ किए जा रहे हैं। इस कन्वेंशन ने यह साबित किया कि जब लड़कियों को सोचने, बोलने और सवाल करने का मंच मिलता है, तो वे न केवल अपने लिए बल्कि समाज और भविष्य के लिए भी स्पष्ट दृष्टि के साथ आगे आती हैं। इस कन्वेंशन में अलग-अलग गांवों और बस्तियों से आई कुल 186 किशोरियों, 12 अभिभावक, 6 कार्यक्रम सहयोगी, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और फोरम के पुराने साथी शामिल हुए। कुल मिलाकर लगभग 228 लोगों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को सामूहिकता और विविधता से भर दिया।
पृष्ठभूमि और तैयारी
तीसरे गर्ल्स कन्वेंशन की तैयारी फोरम के साथियों द्वारा कई हफ्तों तक लगातार बैठकों के माध्यम से की गई। यूथ रिसोर्स सेंटर में हुई इन बैठकों में कन्वेंशन की तिथि, स्थान, रूपरेखा और जिम्मेदारियाँ तय की गईं। साथियों ने अलग-अलग समूह बनाकर मंच संचालन, सजावट, भोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, झोला निर्माण, आई-कार्ड और ब्रोशर तैयार करने जैसी जिम्मेदारियाँ संभालीं। किशोरियों ने अपने-अपने केंद्रों पर पोस्टर बनाए, प्रस्तुतियों की तैयारी की और पुराने कपड़ों से लगभग 200 झोले तैयार किए। कन्वेंशन से पहले 19 दिसंबर को मेहदौना और पहाड़गंज में दो एरिया कन्वेंशन भी आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 180 किशोरियों ने भाग लिया। यह पूरी प्रक्रिया कन्वेंशन को एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक साझा यात्रा बनाती है।
कन्वेंशन की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत किशोरियों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत “सड़कों पर निकली हैं लड़कियां” से हुई। यह गीत उस आत्मविश्वास और साहस का प्रतीक था, जिसके साथ किशोरियां इस मंच पर खड़ी थीं। कार्यक्रम का संचालन कर रही रबाब ने कविता के माध्यम से लड़कियों को यह संदेश दिया कि वे अपने आंचल से परचम बना सकती हैं। कन्वेंशन के उद्देश्य पर बोलते हुए रबाब ने बताया कि प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र पिछले लगभग नौ वर्षों से किशोरियों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन कौशल और नजरिया निर्माण पर काम कर रहा है। यह कन्वेंशन वह अवसर है, जहां पूरे साल के काम, सीख और सवाल एक उत्सव के रूप में सामने आते हैं।
सवालों के जरिए सोच की शुरुआत
कार्यक्रम के शुरुआती हिस्से में सभी प्रतिभागियों से पाँच सवालों के जवाब लिखवाए गए- अपने लिए, दुनिया से, सरकार से, घर वालों से क्या चाहती हैं और खुद दुनिया के लिए क्या करना चाहती हैं। इन जवाबों में सम्मान, प्यार, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, समानता, न्याय, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर समाज की आकांक्षाएँ स्पष्ट रूप से उभरकर आईं। यह गतिविधि किशोरियों के भीतर चल रही सोच और उनके सपनों की झलक थी।
समूह गतिविधियाँ और सत्र
इसके बाद प्रतिभागियों को दस समूहों में बांटा गया-रोहू, कतला, सुरमई, डॉल्फिन, पामफ्रेट, सिंगी, मांगुर, सौर, बाम और फिश ज्वेलरी।
- रोहू समूह में शेरो-शायरी, कविता और गीतों के माध्यम से आत्म-अभिव्यक्ति को स्थान मिला।
- कतला समूह ने “अपना पैसा-अपनी सरकार” गतिविधि के जरिए यह समझ बनाई कि जनता और सरकार का रिश्ता कैसे काम करता है।
- सुरमई समूह में कहानी और चना गेम के माध्यम से असमानता और अमीरी-गरीबी के नियमों पर चर्चा हुई।
- डॉल्फिन समूह ने महिला असमानता पर सवाल उठाते हुए यह समझ विकसित की कि महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं।
- पामफ्रेट समूह ने बंधुत्व और राष्ट्रगान के शब्दों के माध्यम से विविधता और एकता की बात रखी।
- सिंगी समूह में कहानी लेखन के जरिए भेदभाव, आज़ादी और पर्यावरण जैसे विषयों पर सोच बनी।
- मांगुर समूह में स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता पर खुलकर बातचीत हुई।
- सौर समूह में नियम, कानून और संसाधनों की असमान पहुंच को खेल के माध्यम से समझाया गया।
- बाम समूह का नेचर वॉक सत्र प्रकृति, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जोड़ने वाला रहा।
- फिश ज्वेलरी समूह में “चौथे अब्बा” किस्सागोई के माध्यम से पितृसत्तात्मक संरचनाओं पर गहरी बातचीत हुई।
इन सभी सत्रों के बाद समूहों ने अपनी समझ को चार्ट पेपर और मंच प्रस्तुतियों के माध्यम से साझा किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
चारों केंद्रों की किशोरियों ने नृत्य, कविता और अनुभव साझा किए। इन प्रस्तुतियों में पिछले एक साल की सीख, बदलाव और आत्मविश्वास झलक रहा था।
अतिथियों की भागीदारी
कार्यक्रम में कई संगठनों और संस्थानों से आए अतिथियों की मौजूदगी रही। साकेत महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार सिंह, सरजू फाउंडेशन, वी एम्ब्रोज, मेधावी एक्शन ऐड एसोसिएशन,, गोमती सोशल फाउंडेशन, दिशा फाउंडेशन, जन शिक्षण केंद्र, लश्करी एकेडमी सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। डॉ. अनिल कुमार सिंह ने किशोरियों को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान बनना एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने साहित्य, कला और सोच को इंसानियत का आधार बताया और लड़कियों से अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया।
पुष्पा पाल का वक्तव्य
इसके बाद जन शिक्षण केंद्र अंबेडकर नगर की निदेशक और फोरम की पॉश कमेटी सदस्य पुष्पा पाल ने मंच से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज इतनी सारी लड़कियों को एक साथ देखकर और उनके प्रेजेंटेशन देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। अवध पीपुल्स फोरम ने लड़कियों को सपने बुनने और अपने लिए सोचने का मंच दिया है। लड़कियां किसी से कम नहीं हैं, बस उन्हें अवसर चाहिए। यह मंच लड़कियों को समूह में सीखने और आगे बढ़ने की ताकत दे रहा है।
समापन वक्तव्य
कार्यक्रम के अंत में गुफ़रान ने तीसरे गर्ल्स कन्वेंशन के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र की टीम की मेहनत को सराहा और कहा कि किशोरियों का आत्मविश्वास समाज में समता की ओर बढ़ते कदम का संकेत है। उन्होंने अगले साल और मजबूती से समुदाय में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समापन
अंत में अतिथियों को किशोरियों द्वारा पौधे भेंट किए गए और “फूल बगिया मा” गीत के साथ सामूहिक फोटो ली गई। तीसरा गर्ल्स कन्वेंशन यह साबित करता है कि जब लड़कियों को मंच मिलता है, तो वे सिर्फ अपनी कहानी नहीं कहतीं-वे समाज को बदलने की दिशा तय करती हैं।

