युवानिया डेस्क:
सर्व सेवा संघ द्वारा वाराणसी के राजघाट में 100 दिन का सत्याग्रह शुरू किया गया है जिसकी शुरुआत 11 सितंबर 2024 को हुई। न्याय के दीप जलाएं नाम से यह सत्याग्रह शुरू किया गया है। इस सत्याग्रह का उद्देश्य राजघाट परिसर को अवैध कब्जे से मुक्त कराना और गिराए गए भवन का पुनर्निर्माण करवाना है। प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से सर्वधर्म प्रार्थना के साथ सत्याग्रह को प्रारंभ किया जाता है, जिसमें दिनभर में अलग-अलग राज्यों से लोग आकर सत्याग्रह में भाग लेते हैं, व उपवास भी करते हैं।
राजघाट, वाराणसी में आचार्य विनोबा भावे की प्रेरणा से स्थापित सर्व सेवा संघ- साधना केंद्र की स्थापना 1960 में हुई थी। इस उद्देश्य के लिए सर्व सेवा संघ ने नॉर्दर्न रेलवे से सेल डीड के जरिए 12.89 एकड़ ज़मीन खरीदी थी, जिसे जिला प्रशासन ने कूटरचित (जाली) और फर्जी बताकर अब से एक साल पहले गिरा दिया था। इसको लेकर कानूनी व ज़मीनी लड़ाई जारी है।
सत्याग्रह में वरिष्ठ गांधीवादी कृष्णा मोहंती, सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, महामंत्री गौरांग महापात्र, मंत्री-अरविंद कुशवाह, अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, अजय यादव, अशोक भारत, उत्कल सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष मिहिर प्रताप दास, रुबिया बेगम, ललित मोहन बेहरा, गौरांग चरण राउत, चूड़ामणि साहू, निलेंद्री साहू आदि शामिल हुए।
चूड़ामणि साहु ने कहा कि, “सर्व सेवा संघ परिसर को गिराने के पीछे सरकार का इरादा गांधी विचार को नष्ट करने का है, परंतु वे अपने मकसद में कभी सफल नहीं होंगे। क्योंकि गांधी विचार इंसानियत का विचार है।”
सत्याग्रह में सर्व सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं 93 वर्षीय वरिष्ठ गांधीवादी विचारक अमरनाथ भाई भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि आचार्य विनोबा भावे ने इस केंद्र की स्थापना सर्वोदय में अंतर्निहित आध्यात्मिक प्रवृत्तियों को विकसित करने के लिए किया था। इसीलिए इस केंद्र को साधना केंद्र के रूप में जाना जाता है।

