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मेरी राय लिव-इन रिलेशनशिप पर

परसराम, छत्तीसगढ़:

लिव इन रिलेशनशिप कानूनी स्थिति के अनुसार किसी महिला पुरुष के लिए बिना शादी किए किसी के साथ रिलेशन में रहना कानून के हिसाब से गलत नहीं है I वह दोनों एक साथ एक छत के नीचे पति-पत्नी की तरह रिश्ता रख सकते हैं I यह गैर कानूनी नहीं है, पर समाज इस रिश्ते को नहीं मानता और ना ही एक साथ रहने की इजाजत देता है I इस रिश्ते को समाज गलत मानता है इसीलिए यह रिश्ता समाज के नजर में गलत है I

युवाओं को सामाजिक मान्यताओं के खिलाफ जाना चाहिए क्योंकि युवा ही देश का भविष्य है I युवा शक्ति ही किसी भी देश और समाज की रीढ़ है I युवा ही देश और समाज को ऊंचे शिखर पर पहुंचा सकते हैं I देखा जा सकता है कि हमारे देश के लिए कई परिवर्तन विकास समृद्धि और सामान लाने ले जाने में युवा सक्रिय रूप से शामिल होकर कार्य करता है I इतना ही नहीं समाज को बेहतर बनाने में और देश के निर्माण में पूरा-पूरा युवा का योगदान है I समाज के निर्माण में भी सर्वाधिक योगदान युवाओं का ही है क्योंकि समाज में रूढ़िवाद है, उसमें क्या सही क्या गलत है उसमें भी छांटकर गलत को छोड़कर सही को अपनाने का काम भी युवा करता है I हर जिम्मेदारी को बेखुदी से निभाता है, जैसे आंदोलन में आगे आना, देश की रक्षा में भी आगे रहना I कुल मिलाकर हर क्षेत्र में युवा के बिना देश अधूरा है I

विवाह संस्था को खतरा है भी और नहीं भी I जैसे कि आज के दौर में जाति विवाह कम और अंतरजातीय विवाह ज्यादा हो रहा है I इस कारण से अगर लड़की-लड़का शादी करते हैं तो उसके परिवार वाले अगर रिपोर्ट करते हैं तो संस्था को खतरा का सामना करना पड़ता है I अगर इसी दौरान कानूनी मान्यता रहने पर कोई खतरा नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट को इसकी मान्यता देनी चाहिए क्योंकि मान्यता मिलने से सामाजिक संस्था और युवाओं को भी कोई खतरा नहीं होगा I अगर हम समानता की बात करते हैं तो सुप्रीम कोर्ट को इसकी मान्यता मिलने पर अंतर जाती शादी विवाह में कोई भेदभाव नहीं होगा I

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