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बाबरी ढहती रही, प्यार के फूल खिलते रहे

अफ़ाक, फैजाबाद :

पप्पू सोनकर, बछड़ा सुल्तानपुर, फ़ैज़ाबाद, अयोध्या के रहने वाले हैं। यह एक हिन्दू परिवार से हैं, पर इनके लिये हिन्दू मुस्लिम का बहुत मतलब नहीं है। यह एक कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं। इसलिए ये जाति धर्म से आगे मानवता और मानवीय मूल्यों को मानते हैं। 

सन 1992 में इनके मोहल्ले में एक मुस्लिम परिवार का आगमन हुआ। पड़ोसी होने के नाते उन लोगों का इनके घर में आना जाना शुरू हुआ। इनके परिवार में कुल चार सदस्य थे – स्वंय, मम्मी, बड़ी बहन और बड़ा भाई। मम्मी, कुछ परिवारों में चौका बर्तन साफ करने का काम करके अपना गुजारा करती थीं और परिवार चलाती थीं । इनकी मेहनत को देखते हुए पप्पू का परिवार इस मुस्लिम परिवार की बहुत सहायता और सहयोग करता रहा। 

इसी बीच उन लोगों का इनके घर पर आना-जाना चल रहा था। उनकी छोटी लड़की मुन्नी से पप्पू की बातचीत शुरू हुई। यह बातचीत और लगाव का सिलसिला काफी लंबा चलता रहा। फिर एक दिन पप्पू को एहसास हुआ कि उनको प्यार हो गया है। प्यार का इजहार कैसे करना हैं पता नहीं था। प्यार का एहसास होने पर भी, इनको कैसे कहना है यह समझ नहीं आया था। इसके साथ ही समाज, मोहल्ले में प्यार के लिए कोई सम्मान की भावना नहीं है। इसका थोड़ा एहसास तो था। पर प्यार, प्यार होता है तो वह नई दिशा खोलता है।

उधर अयोध्या में बाबरी मस्जिद को तोड़ा जा रहा था और इधर पप्पू और मुन्नी धर्मों के सरे बैरिकेड तोड़ते हुए प्यार की महक में खोये हुए थे।

इन्होंने अपनी पहली प्यार की बात छोटे से काग़ज़ के टुकड़े पर लिख कर दे दी। जिसका जवाब इनको मुस्कुराहट से मिला। काफ़ी दिनों तक ये दोनों एक दूसरे से छुप-छुप कर मिलते रहे। सन 2000 में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। 

कई सालों तक मन मुटाव, ऐसे ही चलता रहा। इसके चलते अपने प्यार को न भूल पाने की वजह से पप्पू ने शराब पीना शुरू कर दिया। जब इस बात का पता मुन्नी को चला, वह इनके पास आई और बहुत प्यार से समझाया। जिस तरह से मुन्नी ने बात की इनका कहना है कि इनकी आँख से पानी आने वाला था। खुद को संभालते हुए, बहुत प्यार से इन्होने एक दूसरे को हौसला दिया और वायदा किया कि अब ये एक दूसरे को छोड़कर नहीं जाएंगे। 

6 अप्रैल 2006 को दोनों लोगों ने शादी कर ली। सबसे खास बात यह है कि पप्पू की सास इनकी शादी से बहुत खुश थीं और उन्होंने इन दोनों का बहुत साथ दिया। लेकिन पप्पू के घर पर किसी को पता नहीं था कि इन दोनों लोगों ने शादी कर ली है। सिर्फ पप्पू की मम्मी को पता था। करीबन एक साल तक किसी को पता नहीं चल पाया कि इन दोनों लोगों ने शादी कर ली है। दोनों अपने अपने घर में रहते रहे। मई 2007 में इनके भाई को इनकी शादी के बारे में पता चल गया। दोनों भाई-बहन में काफी लड़ाई हुई तो मुन्नी घर छोड़ कर इनके पास आ गई। उस समय इनकी आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं थी। लेकिन इस विषम परिस्तिथि से इन दोनों को बहुत समय तक गुजरना पड़ा। कई रातें ये दोनों, भूखे ही सोए। इनको अपने प्यार पर भरोसा था कि एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे।

आज इनके दो बच्चें हैं। दोनों काम करते हैं। खुश हैं, बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनके भविष्य को बनाना और सवारना इनका मकसद हैं।

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  • अफ़ाक, फैज़ाबाद उत्तर प्रदेश से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह अवध पीपुल्स फोरम के साथ जुड़कर युवाओं के साथ उनके हक़-अधिकारों, आकांक्षाओ, और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं।

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