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झारखण्ड में आयोजित युवा समावेश पर रिपोर्ट 

कुमार दिलीप:

रोज़गार के संवैधानिक अधिकार और युवा आंदोलन विषय पर एक-दिवसीय युवा समावेश, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी एवं झारखंड किसान परिषद के संयुक्त तत्वधान में 25 सितंबर 2022 को आयोजित किया गया। यह आयोजन चांडिल बाँध आईबी में हुआ।

यह युवा समावेश झारखंड किसान परिषद के अध्यक्ष मोना जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। प्रत्येक प्रतिभागी ने रोज़गार एवं नौकरी के विषय पर अपनी बातें रखी। इन प्रतिभागियों ने बेरोज़गारी के कई कारण बताये और रोज़गार बढ़ाने के अनेक उपाय भी सुझाये। युवाओं ने बढ़ती आबादी की तुलना में कम रोज़गार सृजन, वैकेन्सियों का न भरना, ज़्यादा मशीनीकरण, खेती की उपेक्षा आदि को बढ़ती बेरोज़गारी का कारण बताया। कृषि क्षेत्र, पशुपालन, कुटीर उद्योग पर विशेष ध्यान देने पर बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा किए जा सकते हैं, यह लगभग सारे साथियों की राय थी। कृषकों और अन्य ग्रामीणों को साधन उपलब्ध कराना ज़रूरी है। सिंचाई, सस्ता लोन, लाभकारी मूल्य की गारंटी करना कृषि क्षेत्र में नए रोज़गार बनाने की ओर ज़रूरी कदम है। सारी वैकेन्सियों को तुरंत भरना चाहिए। स्वरोज़गार की पहलकदमी लेने की ज़रूरत भी मानी गयी।

वक्ताओं ने प्रतिभागियों की बातों को आगे बढ़ाया और निष्कर्ष तक पहुँचाया। बेरोज़गारी सरकारी नीतियों के कारण बढ़ रही है। सम्पत्ति, आमदनी, संसाधन की गैरबराबरी बढ़ने पर, कुछ के हाथों सब कुछ सिमटने पर बेरोज़गारी बढ़ेगी ही। इन नीतियों को बदलने के लिए युवा आंदोलन चलाना होगा। संविधान में हर व्यक्ति को सम्मानजनक और ठीक-ठाक आमदनी वाले रोज़गार का अधिकार शामिल कराने का मुद्दा उठाना होगा, सरकार सबको रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराये या बेरोज़गारी भत्ता दे। इसके लिए सरकारी फिजूलखर्ची रोक कर, अरबपतियों पर प्रोपर्टी टैक्स बढ़ाकर, भारी वेतन में कटौती कर, काम का समय घटाकर, आवश्यक संसाधन और अतिरिक्त अवसर बनाए जा सकते हैं। रोज़गार अधिकार पर एक बड़ा युवा आंदोलन करना, युवाओं के भविष्य को बरबाद होने से बचाने के लिये ज़रूरी है।

अंत में सभी ने मिलकर भावी कार्यक्रम हेतु एक युवा शिविर करने का निर्णय लिया। शिविर हेतु संचालन समिति बनायी गयी।
इस युवा समावेश में पोटका, पटमदा, जमशेदपुर, बोड़ाम, चांडिल, निमडीह, ईचागढ़ क्षेत्र के युवा साथी उपस्थित रहे। अंबिका यादव, रवि कुमार, मंथन, कुमार दिलीप, विनय मुर्मू, भाषाण मानमी, उमाकांत महतो, कन्हाई लाल मार्डी, रसराज विद्रोही, शशांक शेखर, जगत, संजीत यादव, किरण बीर जैसे साथी वैचारिक सहयोगी की भूमिका में शामिल थे।

Author

  • कुमार दिलीप झारखण्ड के पूर्वी सिंहभूम ज़िले से एक सामाजिक अगुआ और युवा बुद्धिजीवी हैं। वह राज्य के सोशल ऑडिट यूनिट में कार्यरत हैं। वह पिछले एक दशक से युवाओं को सामाजिक बदलाव के प्रक्रिया में जोड़ने के लिए सक्रिय प्रयास करते आये हैं।

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