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अपना तालीम घर के बच्चों की दिल की बात

जब मैं बड़ा हो जाऊंगा

अनुभव कुमार, कक्षा 10:

जब मैं बड़ा हो जाऊँगा तो मैं अपने बच्चों को यह सलाह दूँगा कि वे लड़कियों और लड़कों को बराबरी से देखें, क्यूंकि जिस तरह का ज़माना आज के समय में हैं, लगता है कि उस समय तक और न बिगड़ जाए। मैं उन्हें यह सलाह भी दूँगा कि अगर तुम्हें कोई सब्जेक्ट/विषय में या किसी और चीज़ में परेशानी हो रही हो, तो उसे अपने से किसी बड़े को बताएं। या कहूँगा कि उसे बताएं जिसमें आपको लगता हो कि वह इस समस्या को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। 

मैं उन्हें यह सलाह भी दूँगा कि अगर तुम्हें यह लगता है कि कोई तुम्हारा दोस्त या कोई अंजान व्यक्ति किसी परेशानी में है, तो उसकी मदद करो और मदद करते वक्त यह मत देखो कि वह तुम्हें जानता है या नहीं। अगर तुम उस समय वहां उपस्थित हो, तो बिना संकोच मदद करो। जिस तरह का ज़माना अभी है, पता नहीं उस समय तक और बिगड़ जाए, किसी को नहीं पता है। क्यूंकि हमारा देश सिर्फ सरकार ही बनाता रह जाएगा, इसलिए हमें जो भी दिखे, बच्चा, बड़ा या नौजवान, उसकी सहायता करनी चाहिए।

मैं उन्हें और ज़्यादा सलाह नहीं दूँगा, क्यूंकि मैं ऐसी संस्था से जुड़ा हूँ (अवध पीपल्स फॉरम), जहां से मैं समझा हूँ कि मेरे अन्दर बहुत समानता आ जाएगी और मेरे बच्चों में भी यह समानता आ जाएगी। मैं हमेशा अपने बच्चों को अपना इतिहास (past), परम्पराएँ याद रखने के लिए कहूंगा, क्यूंकि जो अपने इतिहास (past) को नहीं जानते, वह अपने भविष्य को भी नहीं बना पाते।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ 

अराध्या बनोदिया, कक्षा 8 :

हम सभी जानते हैं कि हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है और पुरुष प्रधान देश भी है। ये पुरुष प्रधान समाज लड़कियों को जीने नहीं देना चाहता। मुझे समझ नहीं आता, मैं इन मर्दों की सोच पर हँसूँ या क्रोधित हो जाऊं? मानव जीवन का अस्तित्व भी एक महिला के कारण ही है, फिर भी यह पुरुष प्रधान समाज केवल पुत्र की ही कामना करता है और अपने इस पागलपन में न जाने इसने कितनी लड़कियों का जीवन नष्ट किया है। किसी देश के लिए मानवीय संसाधन के रूप में स्त्री और पुरुष दोनों समान हैं। 

केवल लड़का पाने की इच्छा ने देश में ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है कि बेटी बचाओ… जैसी योजना चलाने की ज़रूरत आन पड़ी है। यह अत्यंत शर्मनाक है। यद्यपि स्त्रियों के साथ भेदभाव तो सारे विश्व में होता है। आज भी समान कार्य के लिए लड़कियों को अपेक्षाकृत कम वेतन दिए जाते हैं। कहीं अधिक काबिल होने के बाद भी लड़कियों के साथ केवल शोषण होने के पीछे मुख्य कारण अशिक्षा भी है। 

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