Site icon युवानिया ~ YUVANIYA

मेरी कहानी, मेरा परिवर्तन

अलीशा: 

मेरा नाम अलीशा है और मैं फ़ैज़ाबाद-अयोध्या की रहने वाली हूँ। मुझे गर्व है कि मैंने सामाजिक परिवर्तन शाला के पाँचों शिविर पूरे किए हैं। यह शिविर मेरे जीवन में एक नया मोड़ लेकर आई और मुझे अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया। सामाजिक परिवर्तनशाला, उत्तर प्रदेश मेरी लिए पहली घर से बहार निकाल कर पढ़ने सीखने और खुद से दुनियाँ जहान को देखने का अवसर बना। 

मैं ऐसे समाज से आती हूँ जहाँ लड़कियों का बाहर निकलना या काम करना आम बात नहीं है। इस माहौल में यह कार्यक्रम से जुड़ना मेरे लिए एक चुनौती भी था और अवसर भी। आज मैं खुद को बहुत खुशनसीब मानती हूँ कि मैंने यह कदम उठाया।

थोड़े ही वक़्त के लिए ही सही, मैंने होस्टल लाइफ समझ कर शिविर के दिन को जिया, जहाँ खुद से, खुद के लिए कुछ करने और जानने का मौका रहा। जहाँ पढ़ाई थी, खेल था, अखबार था, फिल्म थी, गीत संगीत और साथ मिलकर सवालों के जवाब खोजना था। 

मैंने क्या सीखा?

इस सामाजिक परिवर्तनशाला से मुझे बहुत-सी नई बातें समझने को मिली जैसे दुनिया के बनने का वैज्ञानिक प्रमाण हमने खुद से समझा। 

हमारे देश की मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक स्थिति जो हैं, वह कैसे ऐसे हैं। 

किस तरह सरकार टैक्स के माध्यम से जनता से पैसे वसूल करती है। हमारे पैसों से ही तमाम विकास कार्यों को किया जाता हैं। बैंकिंग, चिट फंड, मैक्रों फाइनेंस व्यवस्था आम लोगों को किस तरह शोषण कर रही है। 

ये जानकारियाँ मेरे लिए बिल्कुल नई थीं और इन्होंने मेरी सोच को बदला है।

यह शिविर और प्रक्रिया क्यों मेरे लिए खास है?

मेरे लिए यह कार्यशाला सिर्फ़ एक क्लास नहीं थी, बल्कि खुद को पहचानने और समझने का एक जीवन अनुभव थी।
यहाँ मैंने सीखा दोस्त बनाना और रिश्तों को निभाना।।
मिलजुलकर रहना और सामूहिकता में रहना।।
हँसना, गाना, नाटक करना।।
और सबसे अहम – बोलने का आत्मविश्वास मेरे भीतर बना है।
पहले मेरे अंदर डर और झिझक थी, लेकिन इस शिविर ने मुझे हिम्मत दी और यह यक़ीन दिलाया कि मैं कुछ कर सकती हूँ।

आगे की राह:

अब मेरी कोशिश है कि हमारे केंद्र से जुड़े बच्चे और किशोरियाँ भी इन बातों को सीखें और समझें। हम अपने समुदाय में नाटक, गीत और गतिविधियों के ज़रिए जागरूकता फैलाएँगे। मेरा सपना है कि लोग के साथ मिलकर सीखना समझना ज़ारी रहे। अपने अधिकारों के प्रति लोग सजग बनें और समुदाय में एक नई दिशा और सोच विकसित हो। मेरे लिए सामाजिक परिवर्तन शाला जीवन की सबसे बड़ी सीख है। इसने मुझे न सिर्फ़ ज्ञान दिया, बल्कि अपनी पहचान बनाने का हौसला भी दिया। आने वाले समय में मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगी कि अपने समुदाय में सकारात्मक बदलाव ला सकूँ।

Author

  • अलीशा फातिमा फैज़ाबाद की रहने वाली एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह वर्तमान में ग्रेजुएशन कर रही हैं और पिछले दो वर्षों से अवध पीपुल्स फोरम के साथ जुड़कर बच्चों और किशोरियों के नज़रिया निर्माण, जीवन कला कौशल और सशक्तिकरण पर काम कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश सामाजिक परिवर्तनशाला से भी जुड़ी हुई हैं। अलीशा का उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और युवाओं को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।

    View all posts
Exit mobile version