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वैज्ञानिक दृष्टिकोण पोस्टर अभियान : तर्कसंगत समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

विकास कुमार :

मौजूदा दौर में सोशल मीडिया पर अवैज्ञानिक सोच और अंधविश्वास फैलाने वाले कंटेंट का बोलबाला है। आधुनिक विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी का उपयोग समाज में गलत सूचनाओं एवं रूढ़िवादी सोच के प्रसार के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।  ऐसे में समाज में वैज्ञानिक चेतना का विकास, तर्कशीलता को प्रोत्साहित करना और लोगों को सत्य से अवगत कराना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

डिजिटल पोस्टर एक प्रभावशाली माध्यम है, जिसके जरिये समाज में वैज्ञानिक सोच, पर्यावरण चेतना और प्रगतिशील विचारों को बड़े पैमाने पर पहुंचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से, बीते एक साल से कुछ युवा साथियों ने मिलकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण पोस्टर अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत विज्ञान, पर्यावरण, जैव विविधता, शिक्षा, वैज्ञानिक खोजों, महान वैज्ञानिकों और समाज सुधारकों के विचारों तथा अन्य सामाजिक मुद्दों पर डिजिटल पोस्टर तैयार किए जा रहे हैं और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए जा रहे हैं।

युवाओं की टीम द्वारा बनाए जाते हैं रचनात्मक पोस्टर

वैज्ञानिक दृष्टिकोण पोस्टर अभियान की शुरुआत 12 फरवरी, 2024 को महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन की जयंती पर हुई। डार्विन के विकासवाद सिद्धांत ने सृष्टि और जीवों की उत्पत्ति को लेकर प्रचलित दैवीय मान्यताओं को चुनौती दी और यह सिद्ध किया कि सभी जीव क्रमिक विकास की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस अवसर पर ‘ट्री ऑफ लाइफ’ को दर्शाते हुए कुछ पोस्टर बनाए गए, जिन्हें सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना मिली।

इसके बाद 15 फरवरी को गैलीलियो गैलीली की जयंती पर भी पोस्टर जारी किए गए। इन पोस्टर्स को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह अहसास हुआ कि सोशल मीडिया पर इस तरह के वैज्ञानिक कंटेंट की भारी कमी है। इसे देखते हुए, अभियान को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया गया और एक समर्पित टीम बनाने की आवश्यकता महसूस हुई।

देशभर के विभिन्न संगठनों, संस्थानों और सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले युवाओं ने इस अभियान से जुड़ने में उत्साह दिखाया। इसके बाद एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें शामिल होने की शर्त थी कि हर सदस्य महीने में कम से कम एक पोस्टर तैयार करेगा। वर्तमान में 40 से अधिक युवा इस अभियान से जुड़े हुए हैं, साथ ही कुछ वरिष्ठ मेंटर भी समूह का हिस्सा हैं, जो पोस्टर्स पर मूल्यवान सुझाव और टिप्पणियां देते हैं। पोस्टर निर्माण और वैज्ञानिक समझ को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से ऑनलाइन कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती हैं।

एक साल : विभिन्न दिवसों पर 40 से अधिक पोस्टर अभियान

पिछले एक वर्ष में, इस पहल के तहत 40 से अधिक विशेष अभियानों के लिए पोस्टर्स तैयार किए गए। इनमें प्रमुख रूप से मैरी क्यूरी जयंती (7 नवंबर), राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी), अल्बर्ट आइंस्टीन जयंती (14 मार्च), जैव विविधता दिवस (22 मई), विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून), राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस (20 अगस्त), पेरियार जयंती (17 सितंबर), भगत सिंह जयंती (28 सितंबर), डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जयंती (15 अक्टूबर), अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस (15 अक्टूबर) और मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) जैसे महत्वपूर्ण दिवस शामिल हैं।

इन पोस्टर्स को व्हाट्सएप स्टेटस, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर साझा किया जाता है। हर अभियान के पोस्टर्स 20,000 से 2 लाख लोगों तक पहुंचते हैं, जो इस प्रयास की सफलता को दर्शाता है।

अभियान का प्रभाव एवं भविष्य की योजना

वैज्ञानिक दृष्टिकोण पोस्टर अभियान को अब तक समाज से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। यह पहल सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के विज्ञान संचारक, संगठन और संस्थाएं भी इन पोस्टर्स का उपयोग स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों में कर रहे हैं। विशेष अवसरों पर इन पोस्टर्स की फोटो प्रदर्शनी भी लगाई जाती है, जिससे लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का निरंतर विकास हो रहा है।

अभियान की टीम भविष्य में इस प्रयास को और अधिक व्यापक स्तर पर ले जाने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य में एक डिस्ट्रीब्यूशन टीम बनाना है, जो हर जिले में इन पोस्टर्स को वितरित करने की ज़िम्मेदारी ले। इसके अलावा, पोस्टर्स को क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवादित करने का लक्ष्य है, ताकि विभिन्न भाषा क्षेत्रों में भी अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ सकें और वैज्ञानिक सोच का विस्तार हो।

इस एक साल की यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि यदि सोशल मीडिया पर रूढ़िवादी शक्तियों से लड़ने के लिए सुनियोजित तरीके से प्रयास किया जाए, तो एक वैकल्पिक व्यवस्था खड़ी की जा सकती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण पोस्टर अभियान समाज में वैज्ञानिक चेतना और तर्कशीलता के विकास की दिशा में एक छोटा, लेकिन सशक्त कदम है।

Author

  • विकास युवा विचारक, स्वतंत्र पत्रकार एवं प्रगतिशील सिनेमा आंदोलन से जुड़े हैं, झारखंड के निवासी,हैं और फिलहाल विशाखापटनम में रहते है।

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