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ग्रामीणों की समस्याओं के हल खोजती, चित्तौड़गढ़ की 60 साल की सनी बाई

सुमन चौहान:

20 साल तक अपने गाँव की वार्ड पंच रहीं, भील समुदाय की सनी बाई, गाँव मोड़ी खेड़ा की निवासी हैं। सनी बाई के पति का नाम शंकर लाल जी है। सनी बाई करीब 60 साल की हैं। उन्होंने गाँव में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में एक सक्रीय भूमिका निभाई है। सनी बाई गाँव के हर व्यक्ति का, ख़ास तौर से बूढ़ी महिलाओं का काम करवाती हैं। फिर चाहे नरेगा में आवेदन करवाना हो, तहसील का काम हो, पेंशन या राशन जुड़वाने को लेकर काम हो या ई-मित्र का काम हो, वह सभी को सहायता करती हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री स्कीम के तहत वह ₹6000 की मिल रही सहायता को प्रत्येक किसान व्यक्ति को, भादसोड़ा बैंक में ले जाकर फॉर्म भरवा रही हैं। सनी बाई सबको उनका पूरा पैसा मिले यह सुनिश्चित करती हैं। वह किसी से चाय तक नहीं मांगती है। निस्वार्थ भावना से लोगों के लिए काम करती हैं। किसी को राशन कोई देता है तो सबको टैंपू में भर कर राशन दिला लाती है, कोई औरत भूखी हो तो अपने घर पर बहू को कहकर उसको खाना खिला देती हैं।

राजस्थान सरकार ने प्रत्येक पंचायत स्तर पर समाधान शिविर लगाया था। सनी बाई ने तब भी तत्परता से सुनिश्चित किया कि प्रत्येक व्यक्ति का कार्ड बन जाए। जिन महिलाएं का कार्ड बनना छूट गया था, उनको सनी बाई भादसोड़ा लेकर गईं और उनका कार्ड बनवाया ताकि वो महिलाएं भी सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

अभी हाल ही की एक घटना है। एक लड़के ने किश्त बांधकर मोटरसाइकिल ख़रीद ली। उस लड़के ने अपने पिताजी का खाता नंबर दिया था। मोटरसाइकिल कंपनी वाले उस लड़के के पिता जी के भी पैसे काटते थे और वह लड़का किश्त भी भर कर आता था। कंपनी वाले दोनों से ही पैसे ले रहे थे। वह बेचारे बूढ़े को पेंशन का पैसा मिलता था उसको भी वह कंपनी वाले ले लेते थे। तो सनी बाई को अपनी परेशानी बतायी। फिर सनी बाई उस व्यक्ति को लेकर भादसोड़ा गई। सनी बाई पढ़ी-लिखी नहीं हैं। वह वो दुकान भी नहीं जानती थी तो उसने लोगों से पूछ-पूछ कर, उस दुकान का पता लगा लिया और तुरंत ही शोरूम जा पहुंची। बाई के साथ नारायणी भी थी। कंपनी के शोरूम पर जब बाई ने हिसाब निकाल कर देने की मांग की, तो कंपनी वाला थोड़ा डर गया और उसने हिसाब निकाल कर दिया। हिसाब अनुसार उस बूढ़े व्यक्ति से ₹11633 कंपनी ने उनके खाता से लिया था, जो कि पूरा ही उसकी पेंशन का पैसा था। सनी बाई पूरी जानकारी लेकर आई हैं और उस बूढ़े व्यक्ति के लड़के द्वारा जमा की गयी किश्तों की रसीदों के साथ मिला करके, जो भी उचित पैसा परिवार को वापस मिलना चाहिए, उसको दिलवाने में मदद करेंगी। कंपनी वालों ने गलती मानते हुए आश्वासन दिया है कि आगे से उनका पैसा नहीं काटेंगे और हाथ जोड़करके अनुरोध किया है कि सनी बाई या परिवार वाले आगे कोई कार्यवाही ना करें। सनी बाई क्षेत्र में चल रहे ऐसे फ्रॉड को उजागर करती हैं, और पीड़ित परिवार की सहायत भी करती हैं। उन्होंने अपने गाँव में 40 परिवारों को प्रधानमंत्री स्कीम के तहत मकान बनाने की राशि दिलवाई है।

सनी बाई बहुत ही लगन से काम करती हैं, उनको स्वयं भी लोगों के साथ, उनको समस्याओं का समाधान करना अच्छा लगता है। सनी बाई हमारे संगठन की साथी भी हैं और उनको लोगों के हक़-अधिकार के लिए काम करने का जुनून है। उनके परिवार वाले भी उनको मना नहीं करते किसी के लिए भी काम करने से। समय के साथ सनी बाई की अपनी पहचान भी बन गयी है सब जगह – तहसील से लेकर पंचायत समिति में। इनके कहने पर सरपंच इनके घर तक आ जाता है और इनका काम करता है। इस उम्र में इस तरह से काम करना बहुत ही कठिन है… लोग पैसा लेकर भी नहीं कर पाते हैं इस उर्जा से इतना काम। पर यह निस्वार्थ भावना से काम में लगी हुई हैं।

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  • सुमन जी, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले से हैं। वह खेतिहर खान मज़दूर शक्ति संगठन और आधारशिला विद्यालय के साथ जुड़ी हुई हैं और कई सालों से आदिवासी बालिकाओं के शिक्षा और स्थानीय मुद्दों पर काम कर रही हैं।

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