सेंधवा, म.प्र. की एक आदिवासी महिला मज़दूर की गाथा

शांता आर्य: जैसे ही खेतों में काम कम हो जाता है सुरमी बाई सोचने लगती है कि अब क्या काम करूँ? सेंधवा में कपास की

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पेरियार और जाति का उन्मूलन

युवानिया डेस्क: पेरियार ई. वी. रामासामी ने भारत में जाति उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्होंने तमिल नाडु में आत्मसम्मान आंदोलन की स्थापना की और

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शंकर गुहा नियोगी – जिन्हे देश के युवाओं का आइकॉन होना चाहिये

अमित: अब सोचता हूॅं कि ऐसा कैसे हुआ कि इतने सालों में कभी नियोगी से मिला ही नहीं? नियोगी से हम लोग कभी नहीं मिले

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ସ୍ବାଧିନ ଭାରତର ପରାଧିନ ନାଗରିକ | ईंट भट्टों के मज़दूर: स्वतंत्र भारत के पराधीन नागरिक

ଡୋଲାମଣି ବନଛୋର (डोलामणी वनछैर): ଓଡ଼ିଶା ପ୍ରଦେଶର କେ.ବି.କେ. ଅଂଚଳ ବଲାଙ୍ଗିର ଜିଲ୍ଲା ତୁରେକେଲା ବ୍ଳକର କୁଲିଆଦର ଗ୍ରାମର ତେର (୧୩) ଗୋତି ଶ୍ରମିକ ପରିବାର ଉଦ୍ଧାର ହେବାର ଚାରିବର୍ଷ ପରେ ମଧ୍ୟ ପ୍ରଶାସନକୁ

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युवतियों और युवकों की दुनिया – ‘युवानिया’

अमित: कहा जा रहा है कि भारत विश्व के सबसे जवान देशों में से एक है। हमारी आबादी का एक तिहाई से अधिक हिस्सा, चौदह

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सहरसा, बिहार के मनोज और उनके टोले के लोगों ने दिखाया जाति प्रथा को आईना

अखिलेश: 55 साल के मनोज राम और उनके पिता निरो राम का जन्म, बरैठ पंचायत के अमृता गाँव के थाना-सौनवर्षा, ज़िला सहरसा (बिहार) में हुआ

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