‘काफल पाको, मिन नी चाखो’ उत्तराखंड की एक मार्मिक लोककथा

महिपाल: चैत का महीना शुरू होने वाला है और इन दिनों उत्तराखंड के जंगलों में काफल का फल पकने को तैयार है। काफल पर एक

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उत्तराखंड की गढ़वाली कहावतों या औखाणों की रोचक दुनिया

सिद्धार्थ:  इंसान के पाषाण काल के दौर से आज तक के सफर को तय करने और इस दौरान विकसित होने में, भाषाओं का बेहद अहम

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उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद शहर की विरासत

अफाक़ उल्लाह: चौक एज में घंटाघर से गुलाबबाड़ी की तरफ़ जाते हुए बायें हाथ पर एक 1920 के करीब शुरू हुई छोटी सी दुकान है।

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