उत्तराखंड की महिलाएँ और आत्मनिर्भरता की दिशा में उनके प्रयास

तरुण जोशी: महिलाएं उत्तराखंड की आर्थिकी की हमेशा से ही रीढ़ बनी रही हैं। यहाँ की आर्थिकी में किसी भी तरह के परिवर्तन का सबसे

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धर्मों का बदलता स्वरूप आज एक चिंता का विषय है 

अफ़ाक उल्लाह: हम सभी किसी न किसी धर्म से जुड़े हुए हैं। हमारे प्रत्येक क्रियाकलाप में धार्मिक मान्यताएं शामिल हैं। पर हम जो देखते हैं

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बच्चों की पिटाई के बारे में कुछ ये कह रही हैं फ़ैज़ाबाद की महिलाएं

हमको लगता है कि अगर बच्चे कोई गलती करते हैं तो उनको बलभर मारना चाहिए। “बच्चे सीने पे चढ़के खाएं, पर खोपड़ी पे सवार न

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देशभक्ति का शासनादेश और एम्मा गोल्डमैन से निकलते कुछ सबक

सत्यम श्रीवास्तव:   आज़ादी का अमृत महोत्सव चारों दिशाओं में अपनी अनुपम छटा बिखेर रहा है। देश तिरंगामय है और समस्त देशवासियों का अपने देश के

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बस चीज़ें बटोर लेने से आसान नहीं होता जीवन का सफर

फ़हीम अंसारी:   एक दिन एक बुनकर सेठ के दो कारीगर आपस में विभिन्न मुद्दों को लेकर उलझे हुए थे। एक कारीगर दुनिया की चकाचौंध की

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पितृसत्तात्मक समाज के निर्माता – महिला बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं है

एड. आराधना भार्गव: अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गर्भपात से जुड़े पचास साल पुराने फैसले को पलट दिया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने

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