उत्तराखंड की गढ़वाली कहावतों या औखाणों की रोचक दुनिया

सिद्धार्थ:  इंसान के पाषाण काल के दौर से आज तक के सफर को तय करने और इस दौरान विकसित होने में, भाषाओं का बेहद अहम

Continue reading

आज न वो घुघुती रही और न आसमान में कौवे

महिपाल: उत्तराखंड के कुमाऊँ और गढ़वाल क्षेत्र में मकर संक्राति के दिन मनाये जाने वाले त्यौहार ‘उत्तरैणी’ और ‘मकरैणी’ का खासा महत्व है। गढ़वाल में

Continue reading

उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद शहर की विरासत

अफाक़ उल्लाह: चौक एज में घंटाघर से गुलाबबाड़ी की तरफ़ जाते हुए बायें हाथ पर एक 1920 के करीब शुरू हुई छोटी सी दुकान है।

Continue reading

महंगाई खा गई छोटे मेलों को!

अफ़ाक उल्लाह: कई दिनों से बाराबंकी के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनकर (हथकरघा) समुदाय के लोगों के साथ मिल-जुल रहे हैं। घूमते-घूमते हम मुश्कबाद गाँव में

Continue reading

संथाल आदिवासी समुदाय ऐसे मानता है सोहराय पर्व

युवानिया डेस्क:  सोहराय पर्वसे संथाल आदिवासियों का एक प्रमुख पर्व है। इस पर्व को मनाने का मुख्य कारण धान पकाने में मदद करने के लिए

Continue reading

छत्तीसगढ़ का लोकगीत – सुवा गीत

दुर्गा दिवान: कार्तिक माह की अमावस के दिन छत्तीसगढ़ में दिवाली मनाई जाती है। दिपावली के दिन चारों तरफ दिया की रौशनी की जगमग होती

Continue reading

1 2 3 5