राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का मेरा अनुभव

गीता ब्राह्मणे: इस कार्यक्रम के तहत हम नवजात शिशुओं से लेकर 18 साल के बच्चों तक का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। इसमें गंभीर बीमारी वाले

Continue reading

आस्तिकता और नास्तिकता से परे है हमारी संस्कृति

पावनी: एक बार मेरे पापा के दोस्त हमारे घर आए हुए थे। दूर का सफ़र था इसलिए रात को वो हमारे घर ही रुके। उनके

Continue reading

आजच्या परिस्थितीबद्दल माझं मतं मांडत आहे | आज के हालातों पर मेरे विचार

उमेश ढुमणे: आपल्या देशात संविधान/लोकशाही आहे। डॉ। बाबासाहेबांनी सांगितलं आहे। संविधान कितीही चांगलं असो पण संविधान चालवणारे लोकं जर वाईट असतील तर आज जी परिस्थिती

Continue reading

सही मज़दूरी और सम्मान के लिए संघर्षरत हैं देश की महिला घरेलू कामगार

श्रुति सोनकर: अक्सर हम देखते है कि महिलाएं घर का सारा काम करने के साथ-साथ दूसरे के घरों में काम करके खुद पैसा भी कमाती

Continue reading

जाति प्रथा और भेदभाव के खिलाफ़ आवाज़ उठाना – हमारा पहला फ़र्ज़ है

कविता भील: यह तो आप सभी जानते हैं कि जाति क्या है। इस दुनिया में सभी व्यक्तियों की अलग-अलग जातियाँ होती हैं। वैसे तो जातियाँ

Continue reading

1 2 3 4 5 11