वैक्सीनेशन सर्वे के दौरान हम फ़ैज़ाबाद की लड़कियों के अनुभव

इरम: आदाब, मेरा नाम इरम है। मैं एम.एस.सी प्रथम वर्ष में पढ़ रही हूं और अवध पीपुल्स फोरम के साथ 100% वैक्सीनेशन का सर्वे कर

Continue reading

झारखंड की दलमा पहाड़ी से शुरू हुई मेरी सामाजिक कार्यकर्ता बनने की यात्रा

कुमार दिलीप: दलमा पहाड़ के तराई में जंगल-झाड़ियों के बीच बसा हमारा गाँव है – बोंटा! वन में बसने के कारण इस गाँव का क्षेत्रीय

Continue reading

बचपन के दिन और गाँव के मेले की खट्टी-मीठी यादें

शिवांशु: मेला, हाट, बाज़ार हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा रहे हैं। हम कहीं भी लगने वालों मेलों के ज़रिये वहाँ की संस्कृति, रीति-रिवाज़, सभी चीज़ों

Continue reading

पढ़ाई कर, परिवार-समाज के लिये कुछ करने का पूनम का संघर्ष

पूनम कुमारी: मैं एक ऐसे परिवार से हूँ जहाँ हर एक चीज बहुत ही मुश्किल से मुकम्मल होती है। एक बार में कुछ मिल जाये

Continue reading

सहदोय डायरीज़: सहदोय में रहने का अनुभव

सहोदय के बच्चों ने अपने शब्दों और तरीके में अपने अनुभव, भावना, समझ, काम और यहाँ के माहौल के बारे में लिखे। स्कूल में टीचर

Continue reading

धान कूटते हुए निकली नई सुबह में जीवन की आवाज़- संस्मरण

एलीन: एतवारी लगभग 30 साल की हो गई है। अपने गांव के देस से दूर दिल्ली शहर में एक सामाजिक संस्था के साथ काम करती

Continue reading

1 2 3 4