धान कूटते हुए निकली नई सुबह में जीवन की आवाज़- संस्मरण

एलीन: एतवारी लगभग 30 साल की हो गई है। अपने गांव के देस से दूर दिल्ली शहर में एक सामाजिक संस्था के साथ काम करती

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आपको सबसे पहले अपनी जाति के बारे में कब पता चला?

आशीष कुमार, अवध पीपल फॉरम, अयोध्या (फैज़ाबाद) (उत्तर प्रदेश) जब मैं 14 साल की उम्र का था तब मैं अपनी छत पर पतंग उड़ा रहा

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जाति प्रथा और भेदभाव के खिलाफ़ आवाज़ उठाना – हमारा पहला फ़र्ज़ है

कविता भील: यह तो आप सभी जानते हैं कि जाति क्या है। इस दुनिया में सभी व्यक्तियों की अलग-अलग जातियाँ होती हैं। वैसे तो जातियाँ

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“अफसोस की बात है कि छुआछूत आज भी हो रहा है”: मधु भील

मधु भील: जाति शब्द तो आप सभी जानते हैं। हर समाज – भील, मीणा, मेघवाल, खटीक, हरिजन आदि, जातियों के लोगों को नीचा मानता है।

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