25 सालों से राजस्थान में जातिगत शोषण के खिलाफ संघर्षरत – नारायणी भील

प्रेरणा: ऊंच-नीच, छुआछूत और जाति आधारित भेदभाव आज भी समाज में देखने को मिल जाता है। समाज का सारा ठेका इन तथाकथित ऊंची जाति वाले

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अनायास: जाति पर रोमिला थापर के विचार और अरविंद अंजुम की टिप्पणी

अरविन्द अंजुम : जाति का निर्माण – एक ऐतिहासिक परिघटना: जाति व्यवस्था के अध्ययन इस सरलीकरण की धारणा से बहुत आगे बढ़ चुके हैं कि

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आपको सबसे पहले अपनी जाति के बारे में कब पता चला?

आशीष कुमार, अवध पीपल फॉरम, अयोध्या (फैज़ाबाद) (उत्तर प्रदेश) जब मैं 14 साल की उम्र का था तब मैं अपनी छत पर पतंग उड़ा रहा

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जाति प्रथा और भेदभाव के खिलाफ़ आवाज़ उठाना – हमारा पहला फ़र्ज़ है

कविता भील: यह तो आप सभी जानते हैं कि जाति क्या है। इस दुनिया में सभी व्यक्तियों की अलग-अलग जातियाँ होती हैं। वैसे तो जातियाँ

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“अफसोस की बात है कि छुआछूत आज भी हो रहा है”: मधु भील

मधु भील: जाति शब्द तो आप सभी जानते हैं। हर समाज – भील, मीणा, मेघवाल, खटीक, हरिजन आदि, जातियों के लोगों को नीचा मानता है।

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