तय करो किस ओर हो तुम: बल्ली सिंह चीमा की कविता

युवानिया डेस्क: बल्ली सिंह चीमा का जन्म 2 सितम्बर, 1952 में चीमाखुर्द गाँव, अमृतसर ज़िला, पंजाब में हुआ था। इनकी माता का नाम सेवा कौर

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ଆଜିର ବ୍ୟବସ୍ଥା ରାଜ୍ଯ ର ଅବସ୍ଥା शोषण को स्वीकार करके दुखी और गरीब होगा खेतिहर मजदूर : ओड़िया कविता

ମନ ସିଂ ମୁର୍ମୁ (मान सिंह मुर्मु): ଆଜିର ବ୍ୟବସ୍ଥା                ରାଜ୍ୟର ଅବସ୍ଥା ନେତା ମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ସକାଶେ ।                 ନିଜେ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ବସି ଗଢିଲେ ନୀତି ପୁଣି କରୁଛନ୍ତି ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ଅନୀତି                  ଜନ ଆନ୍ଦୋଳନକୁ

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कलम आधी नहीं हो सकती

इंदु सिंह: कलम आधी नहीं हो सकतीकलम पीछे नहीं लौट सकतीजितनी बंदूके हैं दुनिया मेंपेंसिल कलम उनसे ज़्यादातादाद में, एक कलमजीवन जीती है,अभिव्यक्ति करती है,प्यार

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ବର୍ଷା (वर्षा)

सोनामुनी मुर्मू: ପହିଲି ପରଶ ବର୍ଷା ରାଣୀର,ମନରେ ଜାଗି ଉଠିଲା ତୁପ୍ତି ଆନନ୍ଦର। ବର୍ଷା ର ସ୍ପର୍ଶ ପାଇ ଖୋଲିଲା ଆଖିପତା,ହସି ଉଠିଲା କେତେ ଯେ ତରୁଲତା । ଭରି ଉଠିଲା ଧରଣୀ, ଯେବେ

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गरीब का स्कूल

राकेश जाधव: एक स्कूल ऐसा भी….!जहाँ पढ़ाई कम और पढ़ना ज़्यादा है।जहाँ अध्ययन कम और रटना ज़्यादा हैं।जहाँ सभ्याचार की तुलना में पढ़ना ज़्यादा हैं।जहाँ

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तुम्हारा क्या बिगाड़ लेगा वो, सवाल पूछो

नितेश दिव्य: तुम्हारा क्या वो बिगाड़ लेगा, सवाल पूछोतुम्हारे पीछे खड़ी है जनता, सवाल पूछो जो चुप रहे तुम तो ये सियासत की जीत होगीतुम्हें

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